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ओएनजीसी-आरआईएल विवाद: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जीएस सिंघवी करेंगे मध्यस्थता!

पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन नवंबर को आरआईएल, निको तथा ब्रिटेन की बीपी को 1.47 अरब डॉलर के मुआवजे का एक नोटिस दिया।
Author नई दिल्ली | December 26, 2016 19:33 pm
रिलायंस इंडस्ट्रीज।

ओएनजीसी-रिलायंस इंडस्ट्रीज विवाद में सरकार ने तीन सदस्यीय पंचनिर्णय समिति के लिये उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जीएस सिंघवी का नाम दिया है। समिति रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के खिलाफ केजी बेसिन क्षेत्र में ओएनजीसी के क्षेत्र की गैस का दोहन करने के मामले में 1.55 अरब डॉलर के मुआवजे के दावे की वैधता के बारे में फैसला करेगी। आरआईएल तथा उसकी सहयोगी ब्रिटेन की बीपी पीएलसी तथा कनाडा की रिको रिर्सोसेस ने 1.55 अरब डॉलर की मांग को लेकर 11 नवंबर को सरकार के खिलाफ पंचनिर्णय अदालत में चुनौती देने को नोटिस दिया था। रिलायंस और उसकी सहयोगियों ने अपनी ओर से पंचों की समिति में ब्रिटेन के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बर्नार्ड एडर को नामित किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने (आरआईएल-बीपी-निको) ने पिछले महीने मध्यस्थ का नाम दिया और सरकार ने अब समिति के लिये सिंघवी का नाम दिया है।’ दोनों मध्यस्थ अब तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति में पीठासीन न्यायाधीश के बारे में फैसला करेंगे।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन नवंबर को आरआईएल, निको तथा ब्रिटेन की बीपी को 1.47 अरब डॉलर के मुआवजे का एक नोटिस दिया। यह नोटिस 31 मार्च 2016 को समाप्त सात साल की अवधि में बंगाल की खाड़ी में रिलायंस के केजी डी6 परियोजना क्षेत्र से लगे ओएनजीसी की परियोजना का 33.83 करोड़ इकाई : ब्रिटिश थर्मल यूनिट गैस की निकासी के खिलाफ है। उत्पादित गैस पर दिये गये 7.17 करोड़ डॉलर रॉयल्टी को घटाने तथा लिबोर जमा दो प्रतिशत ब्याज जोड़ने के साथ कुल 1.55 अरब डॉलर की मांग आरआईएल, बीपी तथा निको से की गयी। आरआईएल केजी-डी6 ब्लाक की परिचालक है और उसकी इसमें 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं बीपी के पास 30 प्रतिशत तथा शेष 10 प्रतिशत हिस्सेदारी निको रिर्सोसेज के पास है। अधिकारी ने कहा कि तीनों सदस्यों के आने के साथ मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

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