December 08, 2016

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करंसी के करंट से उबरा नहीं बाजार

केंद्र सरकार की ओर से पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद होने से दिल्ली में व्यापार जगत में हाहाकार मच गया है। दिल्ली के बाजारों में उपभोक्ता नदारद हैं।

केंद्र सरकार की ओर से पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद होने से दिल्ली में व्यापार जगत में हाहाकार मच गया है। दिल्ली के बाजारों में उपभोक्ता नदारद हैं। बाजार के लगातार खराब हो रहे हालात के विरोध में राजधानी के व्यापारी शनिवार से काली पट्टी पहनकर दुकानें खोलेंगे। इसका फैसला शुक्रवार को व्यापारियों की एक बड़ी बैठक में किया गया है। एक तरफ व्यापार का संकट और ऊपर से आयकर विभाग की ओर से मारे जा रहे छापों को लेकर व्यापारी घबराया हुआ है। देश की राजधानी दिल्ली उपभोक्ता सामान का देश का सबसे बड़ा वितरण केंद्र है। यहां पर लालकिले से लेकर सदर बाजार के पहाड़ी धीरज तक हजारों व्यापारी संकरी गलियों में थोक से लेकर फुटकर सामान का धंधा करते हैं। जिन बाजारों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए लोगों को घंटों लग जाते हैं, वे सिर्फ पांच मिनट में ही रिक्शे के जरिए लालकिले से फतेहपुरी पहुंच रहे हैं। बाजारों में ग्राहक ही नहीं हैं। देश के अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले कारोबारियों को जब फोन के जरिए राजधानी के थोक व्यापारियों ने कह दिया कि पुरानी करेंसी से वे अब कोई भी सामान नहीं बेचेंगें, तो बाहर के व्यापारियों ने अपने राजधानी आने के कार्यक्रम रद्द कर दिए। इसी तरह दिल्ली के स्थानीय फुटकर व्यापारी भी नई करेंसी के अभाव में थोक बाजारों में खरीदारी करने नहीं गए। न्यू लाजपत राय मार्किट ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव उमेश गंभीर ने कहा कि बाजार में न तो अन्य राज्य का कोई व्यापारी और न ही स्थानीय व्यापारी आ रहा है।

 

 

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों के व्यापारी उन्हें पुरानी करंसी पर ही माल बेचने के लिए कह रहे हैं, लेकिन समस्या यहां के थोक व्यापारी की है कि वह पुरानी करंसी किस तरह से व्यवस्थित करेगा। उन्होंने कहा कि बाजार की यह समस्या जल्द ही सुलझने वाली नहीं है। दिल्ली स्टेट वॉच एंड क्लॉक डीलर्स के अध्यक्ष केके वर्मा ने कहा कि उनके बाजार में दो दिन से कोई कारोबार ही नहीं है। अन्य राज्यों के व्यापारी उधार सामान देने क ा निवेदन कर रहे हैं। ऐसे में जो पुराने व्यापारी हैं, उन्हें वे सामान देने की हामी भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से उधार सामान देने के आश्वासन के बाद भी व्यापारी बाजार नहीं आ रहे हैं।
कैट के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि हमने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से आग्रह किया है कि क्योंकि रिटेलर्स ही उपभोक्ता के साथ की कड़ी हैं इसलिए उपभोक्ताओं को सुविधा देने और बाजार को चलायमान रखने के लिए रिटेलर को भी 1000 और 500 के नोट ग्राहकों से लेने के लिए अधिकृत किया जाए जिसकी वैधता के कागजात रिटेलर्स ग्राहक से लें। उच्च मूल्य के नोट बंद होने से ठेके के भुगतान में भी परेशानी आ रही हैं। इसके साथ ही बैंकों में बचत खाते और चालू खाते के बीच अंतर रखा जाए। बैंकों से 10000 रुपये की राशि एक समय में नकद लेने की सीमा बढ़ाई जाए।
फेडरेशन आॅफ ट्रेड एसोसिएशंस आॅफ दिल्ली की ओर से शुक्रवार को खारी बावली में व्यापारियों की एक बैठक हुई। व्यापारियों का कहना है कि एक ओर तो उनकी दुकानों पर कारोबारी खरीदारी के लिए नहीं आ रहे हैं, दूसरी और विभिन्न सरकारी विभागों ने उनकी दुकानों पर छापे मारने शुरू कर दिए हैं। सरकार के इस रवैए के विरोध में ज्यादातर व्यापारी अपनी दुकानें बंद रखने का समर्थन कर रहे थे। लेकिन एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय अरोड़ा ने कहा कि इस समय शादियों का सीजन है, ऐसे में उन्हें आम लोगों के हितों में दुकानें बंद नही रखनी चाहिए। अरोड़ा ने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि उनकी दुकानों पर आयकर विभाग के छापे बंद किए जाएं। सरकार ने बैंक में जो ढाई लाख की सीमा तय की है, उसे व्यापारियों के लिए दस लाख किया जाए। उन्होंने कहा कि व्यापारी चंद दिनों तक सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे। अगर उनके पक्ष में फैसले नहीं लिए गए तो वे सड़कों पर आकर आंदोलन करेंगे।

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First Published on November 12, 2016 2:02 am

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