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तमाम प्रयासों के बावजूद चमक नहीं सका घरेलू पटाखा उद्योग

पटाखों के अवैध निर्माण और बिक्री पर सख्त पाबंदी और चीन निर्मित पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद इस दीपावली पर घरेलू पटाखा निर्माण उद्योग में चमक पैदा नहीं हो सकी है..
Author लखनऊ | November 9, 2015 00:59 am
पटाखे।

पटाखों के अवैध निर्माण और बिक्री पर सख्त पाबंदी और चीन निर्मित पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद इस दीपावली पर घरेलू पटाखा निर्माण उद्योग में चमक पैदा नहीं हो सकी है। उद्योग मंडल एसोचेम के ताजा सर्वेक्षण में यह दावा किया गया है। एसोचेम की ओर से देश में पटाखा उद्योग के हब के नाम से मशहूर शिवकाशी समेत 10 बड़े शहरों में करीब 250 पटाखा निर्माताओं और थोक व खुदरा विक्रेताओं को दायरे में लेकर कराए गए सर्वे के मुताबिक अवैध रूप से पटाखे बनाने और उन्हें बेचने वालों की धरपकड़ व चीन से आयातित पटाखों पर पाबंदी लगाने के सरकार के प्रयासों के बावजूद घरेलू पटाखा निर्माण उद्योग के लिए अपेक्षित नतीजे नहीं मिल सके हैं।

सर्वे के मुताबिक बाजार में अब भी चीनी पटाखों का भारी स्टाक लगा हुआ है जिसे जमाखोरों की मदद से खासकर लखनऊ, अमदाबाद, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, जयपुर और मुंबई में अवैध रूप से बेचा जा रहा है। एसोचेम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने बताया कि पटाखों की मांग में 35 से 40 फीसद तक की भारी गिरावट आई है। साथ ही चीनी पटाखों के अवैध रूप से भारी आयात की वजह से भारतीय पटाखा उद्योग को करीब एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसके अलावा पटाखों की कीमतों में 10 से 15 फीसद की बढ़ोतरी ने भी नकारात्मक असर डाला है।

उद्योग मंडल के अमदाबाद, बंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे में कराए गए इस सर्वे के अनुसार पटाखे जलाने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर के खिलाफ जागरूकता फैलाए जाने से लोगों का पटाखों से मोह कम हुआ है। एसोचेम ने तमिलनाडु में देश के पटाखा उद्योग का हब कहे जाने वाले शिवकाशी जिले के 150 पटाखा निर्माताओं से भी बातचीत की। उनमें से ज्यादातर ने कहा कि उत्तरी भारत में विक्रेताओं के खराब रुख की वजह से पटाखों की मांग में गिरावट आई है।

सर्वे के मुताबिक इन पटाखा निर्माताओं ने बताया कि चीनी पटाखों के अवैध रूप से आयात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए की कीमत में गिरावट के परिणामस्वरूप एल्युमीनियम पाउडर, बेरियम नाइट्रेट और अन्य कच्चे माल के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की वजह से भी पटाखा निर्माण उद्योग पर उल्टा असर पड़ा है। शिवकाशी में मजदूरों की खासी किल्लत की वजह से भी पटाखा उत्पादन में गिरावट आई है। मजदूरों की उपलब्धता में करीब 20 फीसद की कमी आई है।

चीनी पटाखों ने घरेलू पटाखा उद्योग पर बुरा असर डाला है। लेकिन उनके बारे में स्थानीय आतिशबाजी कारोबारियों का कहना है कि इन विदेशी पटाखों से ज्यादा धुआं निकलने और उनके अपेक्षाकृत अधिक असुरक्षित होने की वजह से उनकी मांग में भी गिरावट आई है।

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