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सुरक्षित पनाहगाह खत्म करें, आर्थिक अपराधियों का प्रत्यर्पण सुनिश्चित करें: मोदी ने जी20 समूह से कहा

नरेंद्र मोदी ने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा दायरे को और मजबूत करने का आह्वान किया।
Author हांगझोउ | September 5, 2016 12:56 pm
हांगझोउ (चीन) में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। PTI Photo by Vijay Verma/4 सितंबर 2016/File)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 देशों के नेताओं से कहा कि वे आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाहें खत्म करें और अत्यधिक बैंकिंग गोपनीयता खत्म करें। साथ ही कहा कि प्रभावी वित्तीय संचालन के लिए भ्रष्टाचार और कालाधन से मुकाबला महत्वपूर्ण है। चीन के पूर्वी भाग में स्थित इस शहर में आयोजित जी20 सम्मेलन के दूसरे दिन मोदी ने अपने भाषण में कहा कि प्रभावी वित्तीय संचालन के लिए भ्रष्टाचार, कालाधन और करचोरी से निपटना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ‘इसके लिए हमें आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह खत्म करने, धन शोधन करने वालों की तलाश और उनका बिना शर्त प्रत्यर्पण करने, जटिल अंतरराष्ट्रीय नियमों के जाल को तोड़ने तथा अत्यधिक बैंकिंग गोपनीयता खत्म करने के लिए प्रयास करने की जरूत है जो भ्रष्टाचार और उनके कारनामों पर पर्दा डालते हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वृद्धि के लिए स्थिर वैश्विक आर्थिक और वित्तीय प्रणाली आवश्यक है क्योंकि इससे समावेशी तथा सतत वृद्धि को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा दायरे को और मजबूत करने का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्विटर पर जारी कई संदेशों में प्रधानमंत्री के हवाले से कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), क्षेत्रीय वित्तीय व्यवस्था एवं द्विपक्षीय अदला-बदली व्यवस्थाओं के बीच हमें निरंतर वार्ता की जरूरत है। वित्तीय स्थिरता बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों को अपने मुख्य कामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’

मोदी ने कहा, ‘आईएमएफ को कोटा आधारित संस्थान बने रहना चाहिए और उसे उधार पर लिए गए संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।’ साथ ही प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि लंबे समय से अटकी कोटा की 15वीं आम समीक्षा 2017 की सालाना बैठकों तक पूरी हो जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, ‘भारत को अपने विकास को समर्थन प्रदान करने के लिए ऊर्जा की जरूरत है। परमाणु, नवीकरणीय ऊर्जा और जीवाश्म ईंधन का संतुलित मिश्रण हमारी नीति का केंद्र है।’ जी20 सदस्य विश्व के सकल घरेलू उत्पाद के 85 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। जी20 देशों में अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं।

मोदी ने बाद में सम्मेलन में ‘सुदृढ़ अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश’ पर अपने भाषण में कहा कि वैश्विक व्यापार महत्वपूर्ण मुकाम पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शी, समान, गैर-विभेदकारी, खुले, समावेशी और नियम आधारित वैश्विक व्यापार बुनियादी ढांचे से सामूहिक प्रयासों को मदद मिलनी चाहिए। मोदी ने जी20 के सदस्य देशों से अपील की कि व्यापार को सुविधा प्रदान करने के लिए बाली और नैरोबी मंत्रिस्तरीय फैसलों को पूरी तरह लागू करने में मदद मिलनी चाहिए। नैरोबी निर्णय 2013 में बाली मंत्रिस्तरीय बैठक में तरजीही नियमों पर हुए फैसलों को आगे बढ़ाता है। इसमें कृषि पर मंत्रिस्तरीय फैसले शामिल हैं जिसमें कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी से मुकाबले के लिए विकासशील देशों के लिए विशेष सुरक्षा प्रणाली शामिल है।

मोदी ने कहा, ‘वैश्विक व्यापार प्रणाली को विकासशील देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर काम करना चाहिए। वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को उन्हें समान अवसर प्रदान करना चाहिए, भारत की प्राथमिकता है कि सेवा के लिए व्यापार सुविधा समझौते पर काम करना है।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जी20 को निवेश प्रवाह बढ़ाने पर काम करने की जरूरत है। परिवर्तित और उदारीकृत निवेश प्रणाली ने एफडीआई के लिए भारत को शीर्ष गंतव्य देशों में रखा है।’ उन्होंने अपना दूसरा भाषण यह कहते हुए खत्म किया कि वैश्विक निवेश का सिद्धांत निर्देशात्मक नहीं होना चाहिए। मोदी ने कहा, ‘विभिन्न देशों को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों और विकास के केंद्र को ध्यान में रखकर नीतिगत स्थान देने की जरूरत है।’

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