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भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम: मोदी ने की लाभकारी साझेदारी की हिमायत

ब्रिटेन यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहांशीर्ष कारोबारी प्रमुखों को आश्वस्त किया कि भारत उद्यमियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा करने को प्रतिबद्ध है,,
Author लंदन | November 14, 2015 01:13 am
भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम की पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

ब्रिटेन यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहांशीर्ष कारोबारी प्रमुखों को आश्वस्त किया कि भारत उद्यमियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा करने को प्रतिबद्ध है। इस दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई देश और बहुराष्ट्रीय कंपनियां चाहती हैं कि भारत वैश्विक मापदंडों के अनुरूप अपने पेटेंट कानूनों को बनाए।

प्रधानमंत्री ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से इस बारे में आश्वस्त हूं और आपको आश्वासन देना चाहता हूं कि भारत सभी नवोन्मेषकों और उद्यमियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता और बौद्धिक संपदा प्रशासन से जुड़ी आॅनलाइन प्रक्रिया के संबंध में कई पहल को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, एक समग्र राष्ट्रीय आइपीआर नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

एक खास बैठक में मोदी की ओर से भारत को निवेश के लिए सबसे वाजिब स्थल के रूप में पेश किए जाने परभारत और ब्रिटेन के शीर्ष कारोबारी संगठनों के मुख्य कार्यकारियों ने और अधिक पारदर्शिता और सतत निर्णय लेने वाली व्यवस्था और विश्वभर की कंपनियों के साथ समान व्यवहार करने की जरूरत पर जोर दिया। ब्र्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सरकारी कार्यालय के बगल में 11 डाउनिंग स्ट्रीट पर सीईओ की इस बैठक में मोदी ने कहा, हम विश्वास के साथ सतत और अथक रूप से अपनी अर्थव्यवस्था को विश्व के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।

पुनर्गठित भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम की पहली बैठक में ऐसे छह विषयों को चिह्नित किया गया था जिनमें सहयोग को आगे बढ़ाया जाना है। ये छह क्षेत्र हैं- स्मार्ट सिटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, शिक्षा व कौशल, इंजीनियरिंग, रक्षा व सुरक्षा और वित्तीय-पेशेवर सेवा क्षेत्र। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए 15 क्षेत्रों को खोलने के नियमों में छूट देने के हाल के सरकार के निर्णय समेत अन्य सुधार पहलों का जिक्र करते हुए मोदी ने भारत की निवेश के सबसे उपयुक्त स्थल के रूप में पुरजोर वकालत की। कैमरन ने कंपनियों के प्रमुखों व मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को नई कारोबारी साझेदारी बनाने और निवेश के अवसरों के लिए सर्वश्रेष्ठ रास्तों की पहचान करने के साथ भारतीय और ब्रिटिश कंपनियों से वर्तमान वाणिज्यिक संबंधों की पहचान करके इनका उपयोग और अधिक नवोन्मेषी गठबंधन बनाने की दिशा में करने को प्रोत्साहित किया।

फोरम की बैठक की सह अध्यक्षता भारतीय पक्ष से टाटा ग्रुप के अध्यक्ष साइरस मिस्त्री और ब्रिटेन की तरफ से स्टैंडर्ड लाइफ के अध्यक्ष जेरी ग्रिमस्टोन ने की। अपनी शुरुआती टिप्पणी में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि और भारत के कायाकल्प के उनके इरादे के बारे में बताया। मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच के संबंधों में आर्थिक रिश्ते अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं और भारत में ब्रिटिश कंपनियों द्वारा निवेश दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी होगा।

मोदी ने अपने संबोधन में सरकार की कई पहलों का जिक्र किया, जिसमें ‘मेक इन इंडिया’, विभिन्न क्षेत्रों को एफडीआइ के लिए खोलने और 2022 तक पांच करोड़ नए घर बनाने के साथ 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की प्रतिबद्धता शामिल है। दोनों देशों के ऐतिहासिक और अच्छे संबंधों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन आर्थिक रूप से एक-दूसरे के लिए बने हैं और इस संबंध को निजी क्षेत्र के सीईओ को आगे बढ़ाना है। आधिकारिक बयान के अनुसार, ऐसा महसूस किया गया है कि वर्तमान समय में भारत निवेशकों के लिए ‘अपार अवसरों का स्थल है। मोदी ने कहा कि सरकार भारतीय रेलवे स्टेशनों का निजी सार्वजनिक साझेदारी के जरिए विकास करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र हमारे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का आधार है।

इस बीच पेरिस के जलवायु शिखर सम्मेलन से पहले भारत और ब्रिटेन के बीच ऊर्जा व जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में सहयोग के वृहद पैकेज पर सहमति बनी है। इसमें 3.2 अरब पौंड के वाणिज्यिक करार भी शामिल हैं। नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने और उचित व टिकाऊ ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के महत्त्व को लेकर फिर से प्रतिबद्धता जताई। ऐसी ऊर्जा जिससे कि आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी।

ब्रिटेन की ऊर्जा व जलवायु परिवर्तन मंत्री अंबर रूड ने कहा, ब्रिटेन व भारत के बीच ऊर्जा पर भागीदारी मजबूत से और मजबूत हो रही है। हम शोध और नवोन्मेषण में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता को साझा कर रहे हैं। विशेष रूप से हरित वित्त और प्रौद्योगिकी में अनुभव के चलते हम सुरक्षित, सस्ती तथा टिकाऊ ऊर्जा की आपूर्ति को प्रोत्साहन देने व जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।

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