December 08, 2016

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बड़े बैंकों ने 32 लाख से ज्यादा डेबिट कार्ड वापस मंगवाए

देश के बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों के 32 लाख से अधिक डेबिट कार्ड या तो ब्लाक कर दिए हैं या वापस मंगवाए हैं ताकि उन्हें किसी वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाया जा सके।

देश के बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों के 32 लाख से अधिक डेबिट कार्ड या तो ब्लाक कर दिए हैं या वापस मंगवाए हैं ताकि उन्हें किसी वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाया जा सके। बैंकों ने यह कदम एक निजी बैंक के एटीएम नेटवर्क का प्रबंध करने वाली भुगतान सेवा प्रदाता फर्म के यहां डेटा में बड़ी सुरक्षा सेंध को देखते हुए उठाया है। अकेले भारतीय स्टेट बैंक ने ही लगभग छह लाख कार्ड वापस मंगवाए हैं। वहीं बैंक आफ बड़ौदा, आइडीबीआइ बैंक, सेंट्रल बैंक व आंध्रा बैंक ने एहतियाती कदम के रूप में डेबिट कार्ड बदले हैं। इस बीच बैंकों के डेटा में बड़े स्तर की इस सेंधमारी पर वित्त मंत्रालय की चिंता भी बढ़ गई है। मंत्रालय ने बैंकों से इस बाबत जानकारी मांगी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने के लिए कहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वित्तीय सेवा विभाग ने भारतीय बैंक संघ से इस तरह के डेटा के जोखिम में पड़ने के प्रभाव की जानकारी मांगी है।


केवल भारतीय स्टेट बैंक ही नहीं आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक व यस बैंक जैसे बैंकों ने भी धोखाधड़ी की आशंका के मद्देनजर अपने ग्राहकों से एटीएम पिन बदलने को कहा है। एचडीएफसी बैंक ने भी अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे किसी भी लेनदेन के लिए केवल अपना एटीएम कार्ड इस्तेमाल करें। सूत्रों के मुताबिक यह सुरक्षा चूक हिताची पेमेंट्स सर्विसेज की प्रणाली में एक मालवेयर के जरिए हुई है। यह कंपनी यस बैंक को सेवा देती है। हिताची पेमेंट्स एटीएम सर्विसेज, प्वाइंट आफ सेल सर्विसेज, इमेजिंग पेमेंट्स सर्विसेज आदि के जरिए सेवाएं देती है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार को भारतीय स्टेट बैंक से जानकारी मिली है कि कुछ डेबिट कार्डों के पिन (निजी पहचान संख्या) दूसरों के हाथ लग गए हैं और बैंक इन्हें सुरक्षित तरीके से नए कार्डों से बदल रहा है। बैंक ने डेटा की सुरक्षा के लिए और भी कुछ कदम उठाए हैं। स्टेट बैंक ने एक बयान में कहा है कि कार्ड नेटवर्क कंपनी एनपीसीआइ, मास्टर कार्ड और वीजा ने विभिन्न बैंकों को सूचित किया है कि कुछ कार्डों का डेटा चोरी हो सकता है। इसके चलते हमने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं और नेटवर्क कंपनियों द्वारा पहचान किए गए कुछ कार्डों को बंद भी किया है।

सूत्रों का कहना है कि एसबीआइ जैसे कई बैंकों ने लगभग छह लाख कार्ड वापस मंगवाए हैं। इस घटना के मद्देनजर यस बैंक के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी राणा कपूर ने आउटसोसर््िंाग में अधिक सतर्कता की जरूरत रेखांकित की है। उन्होंने कहा, जहां आउटसोर्स भागीदार शामिल हैं वहां और अधिक सतर्कता की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आपूर्ति व प्रणाली को जाोखिम में नहीं डालें। बैंकरों के अनुसार यह सुरक्षा सेंध इस तरह से हुई है कि क्षेत्र में उक्त बैंक का एटीएम इस्तेमाल करने वाला प्रभावित हो सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक ने एक बयान में कहा है, कार्ड नेटवर्क कंपनी एनपीसीआइ, मास्टरकार्ड व वीजा ने डेटा सेंध के मद्देनजर विभिन्न बैंकों को कुछ कार्डाें को संभावित जोखिम के बारे में लिखा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने एहतियाती कदम उठाए हैं और कुछ ग्राहकों के कार्ड बंद (ब्लाक) कर दिए हैं। एसबीआइ की उप प्रबंध निदेशक व मुख्य परिचालन अधिकारी मंजू अग्रवाल ने कहा कि डेटा सेंध मई व जून के बीच हुई । लेकिन यह सितंबर में सामने आया।
उन्होंने कहा, हमने अपने ग्राहकों से एटीएम पिन नंबर बदलने का आग्रह किया था, लेकिन केवल सात प्रतिशत ग्राहकों ने ही अपना पिन बदला। हमने कार्ड वापस मंगवाने का फैसला किया है क्योंकि हम अपने ग्राहकों को किसी जोखिम में नहीं डालना चाहते। हालांकि उन्होंने वापस मंगवाए गए कार्डाें की संख्या नहीं बताई।

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First Published on October 21, 2016 6:27 am

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