December 03, 2016

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नोटबंदी: जनधन अकाउंट का इस्तेमाल करके इस तरह कालेधन को बदल रहे “बिचौलिए”

जनधन अकाउंट जीरो बैलेंस पर खुलता है और यह अधिकतर गरीबी रेखा से नीचे (BPL) वाले परिवारों के पास है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

मोदी सरकार के देश में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने के फैसले के बाद कालाधन रखने वाले लोगों ने अपने पैसों को बदलने का तरीका भी खोज लिया है। फैसले के बाद बाजार में कालेधन को बदलने वालों की तादात में तेजी से इजाफा हुआ है। बताया जा रहा है कि कालाधन बदलने वाले बिचौलिए इस काम के लिए जनधन अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनधन अकाउंट जीरो बैलेंस पर खुलता है और यह अधिकतर गरीबी रेखा से नीचे (BPL) वाले परिवारों के पास है। बताया जा रहा है पैसे बदलने वाले जनधन अकाउंट में 2.5 लाख कीमत तक 500 और 1000 रुपए के नोट डाल रहे हैं, जिन्हें बाद में निकाल लिए जाएगा।

बैंक के बाहर लाइन में लगे एक चाय वाले ने बताया, “मुझे अपने जनधन अकाउंट में 2.5 लाख रुपए डालने के बदले अच्छी खासी रकम दी जा रही है। जब अकाउंट से बड़ी रकम निकलने पर रोक हट जाएगी तब यह पैसा वापस कर दूंगा।” जानकारी के मुताबिक, पैसा बदलने वाले इस काम के लिए पूरी कीमत का 20-30 फीसदी ले रहे हैं। देशभर में 25 करोड़ से ज्यादा जनधन अकाउंट हैं और बिचौलिए इसका इस्तेमाल कालेधन को बैध करेंसी में बदलने के लिए कर रहे हैं।

हालांकि ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टीशनर के वाइस प्रेसिडेंट नारायण जैन ने बताया कि इस तरह की ट्रिक बड़े स्तर पर संभव नहीं हो सकती। हालांकि उन्होंने माना कि छोटे स्तर पर इन अकाउंट का गलत इस्तेमाल हो भी सकता है। बिल्डिंग के लिए माल सप्लाई करने वाले एक व्यापारी ने बताया कि सरकार के इस फैसले के बाद काफी दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया, “हमारा अधिकतर लेन-देन कैश में होता है, लेकिन अब हमने अपने कैश का रास्ता निकाल लिए है। हमें एक करोड़ के बदले 70 लाख रुपए मिल रहे हैं।” वहीं, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक सूत्र ने बताया कि इस तरह के बिचौलियों पर विभाग की कड़ी नजर है और हाल ही में एक शख्स को पकड़ा भी जा चुका है।

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First Published on November 14, 2016 11:33 am

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