ताज़ा खबर
 

सरकार एचएसबीसी सूची में दर्ज नए नामों की जांच करेगी: अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि स्विस बैंक में खाता रखने वाले भारतीयों से जुड़े नए नाम सामने आए हैं और उनकी प्रामाणिकता की जांच की जाएगी जबकि 60 मुकदमे पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। जेटली ने यह बात पत्रकारों की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा एचएसबीसी की एक सूची के खुलासे […]
Author February 9, 2015 15:04 pm
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अगुआ रहे अण्णा हजारे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे केवल कॉरपोरेट जगत की चिंता है।(फ़ोटो-पीटीआई)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि स्विस बैंक में खाता रखने वाले भारतीयों से जुड़े नए नाम सामने आए हैं और उनकी प्रामाणिकता की जांच की जाएगी जबकि 60 मुकदमे पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।

जेटली ने यह बात पत्रकारों की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा एचएसबीसी की एक सूची के खुलासे के मद्देनजर कही जिसमें बड़े उद्योगपतियों और राजनीतिक नेताओं समेत कुछ अन्य भारतीयों के नाम हैं।

जेटली ने कहा कि कर विभाग ने एचएसबीसी बैंक की स्विस शाखा में खाता रखने वाले भारतीयों की पहले प्राप्त सूची में से 60 के खिलाफ मुकदमा शुरू कर दिया है और आज जिन नामों का खुलासा हुआ है उनमें से ज्यादातर के बारे में सरकार को पता है।

जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा ‘‘कुछ नए नामों का खुलासा हुआ है जिनकी प्रामाणिकता की जांच प्रशासन द्वारा की जाएगी।’’ उन्होंने साथ ही कहा कि सरकार ने काले धन का पता लगाने के लिए पिछले छह-सात महीने में जोरदार प्रयास किए हैं।

वह एक अखबार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक खबर पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि एचएसबीसी की सूची में 1,195 भारतीयों के नाम हैं जिनके पास खाते में कुल 25,420 करोड़ रुपए जमा हैं। इनमें से कई खाते वैध हो सकते हैं।

जेटली ने कहा कि उन्होंने दावोस में पिछले महीने स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्री समेत कई शीर्ष स्विस अधिकारियों से मुलाकात की थी और इस पर सहमति बनी थी कि कर-निर्धारितियों के कबूलनामे को जानकारी जुटाने की दिशा में अतिरिक्त साक्ष्य माना जाएगा।

आज जो भारतीय नाम जारी किए गए हैं वे स्विट्जरलैंड में एचएसबीसी बैंक की प्राइवेट बैंकिंग इकाई में खाता रखने वालों की एक सूची में शामिल हैं। इस सूची में दुनियाभर के लोगों के नाम और 2006-07 में उनके खातों में जमा राशि बतायी गयी है। इस सूची में 200 से अधिक देशों के लोग शामिल हैं जिनके खातों में उस समय 100 अरब डॉलर (आज के हिसाब से 6,000 अरब रुपए) जमा थे।

आज 1,195 भारतीयों के नाम सामने आए हैं। यह एचएसबीसी के खाताधारक भारतीय नामों की पहली सूची की संख्या का दोगुना हैं। पहली सूची फ्रांस की सरकार ने 2011 में भारत को दी थी।

जेटली ने कहा कि गैरकानूनी तौर पर विदेशों में खाता रखने वाले 60 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा शुरू किया है और 350 अन्य से जुर्माने वसूलने की कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग मुखबिरों के संपर्क में है ताकि ऐसे और लोगों की जानकारी हासिल की जा सके।

उन्होंने कहा ‘‘मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि पहले दौर में ये नाम एचएसबीसी बैंक से जुड़े नाम थे.. ये सभी नाम (सभी) स्विस बैंकों से जुड़े नहीं थे बल्कि केवल एक बैंक एचएसबीसी से जुड़े थे, इस मामले में भारत सरकार और राजस्व विभाग ने उस वक्त (4-5 साल पहले) कुछ खतों किताबत की थी। इनमें 628 खातों से जुड़े ब्योरे थे।’’

उन्होंने कहा कि इस सूची में कुछ प्रविष्टियों में सिर्फ नाम थे और कुछ खातों की पहचान हो सकती थी जबकि कुछ की पहचान नहीं हो सकती थी।

वित्त मंत्री ने कहा ‘‘पिछले 7-8 महीने से इस मामले में जोरदार प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों के तीन पहलू हैं, हमने बहुत से नामों की पहचान कर ली है। कुछ मामलों में, जैसा कि आम तौर पर होता, पते और ब्योरों का पता लगाना कठिन होता है, इसलिए उनमें काम किया जा रहा है।’’

जेटली ने कहा कि एचएसबीसी की पूर्व सूची में जाहिर 628 खाताधारकों में से करीब 350 मामलों में कर निर्धारण (असेसमेंट) पूरा हो गया है और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा ‘‘शेष कर निर्धारण 31 मार्च, 2015 तक पूरा कर लिया जाएगा।’’ साथ ही उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जेटली ने कहा कि अब तक 60 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और ऐसे मामलों में नाम सार्वजनिक किए गए हैं जिनमें मुकदमा शुरू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सभी खाताधारकों के नाम गैरकानूनी नहीं हो सकते क्योंकि कुछ ने कर विभाग को अपने विदेश के कारोबारी सौदों के बारे में जानकारी दी है जबकि इस सूची में शामिल कुछ नाम प्रवासी भारतीयों के हैं।

जेटली ने कहा कि सरकार ने पिछले साल अक्तूबर में स्विट्जरलैंड की सरकार से बातचीत करने के लिए एक शिष्टमंडल भेजा था क्योंकि संदिग्ध मामलों से जुड़े साक्ष्य स्विट्जरलैंड में हैं। उन्होंने कहा ‘‘स्विट्जरलैंड कहता रहा है कि इन खाताधारकों के नाम चुराए गए आंकड़ों पर आधारित हैं और अपने देश की नीति के तहत वहां की सरकार चोरी के आंकड़ों के आधार पर जांच में सहयोग नहीं कर सकती, 15 अक्तूबर को एक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।’’

जेटली ने कहा ‘‘पिछले महीने जब मैं दावोस (स्विट्जरलैंड) गया था तो उनकी वित्त मंत्री और वहां के राजस्व अधिकारियों से मुलाकात हुई थी और उनके सामने हमने यह मुद्दा फिर उठाया था क्योंकि हमारी आकलन प्रक्रिया में कुछ ऐसे मामले हैं जिनमें कुछ लोगें ने खाते रखने की बात कबूल की है।’’

उन्होंने कहा ‘‘सवाल यह उठा कि क्या किसी कर-निर्धारिति के कबूलनामे को अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है। जिस संबंध में उन्होंने (स्विस सरकार) कहा कि वह इसे साक्ष्य के तौर पर स्वीकार करेंगे। अब इन सब मामलों में खाताधारकों को दंड देने का एक तरीका यह है कि जुर्माना और मुकदमा चलाया जाए और उक्त राशि वापस ली जाए.. यह प्रक्रिया अभी चल रही है।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग