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कोयला खदान के लिए जिंदल व बाल्को की बोलियां ख़ारिज

सरकार ने बोली लगाने में सांठगांठ की चर्चा के बीच जिंदल स्टील एंड पावर और बाल्को की चार कोयला खदानों के लिए लगाई गई बोली निरस्त कर दी और कहा कि वह विचार विमर्श के बाद ही इन खदानों के बारे में कोई अंतिम फैसला करेगी। कोयला और बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि […]
Coal Auction: बोली लगाने में सांठगांठ की चर्चा के बीच सरकार की कार्रवाई।

सरकार ने बोली लगाने में सांठगांठ की चर्चा के बीच जिंदल स्टील एंड पावर और बाल्को की चार कोयला खदानों के लिए लगाई गई बोली निरस्त कर दी और कहा कि वह विचार विमर्श के बाद ही इन खदानों के बारे में कोई अंतिम फैसला करेगी। कोयला और बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कोयला विभाग इन निरस्त की गर्इं खदानों के बारे में अंतिम फैसला इस पर सोच-विचार के बाद करेगा।

कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) और बाल्को की चार खदानों की बोली को खारिज कर दिया। ऐसी चर्चा थी कि इन खदानों के लिए हाल में लगाई गई बोली में सांठगांठ की गई। यह पूछे जाने पर कि इन कोयला खदानों की फिर से नीलामी की जाएगी या फिर इन्हें कोल इंडिया को दे दिया जाएगा, गोयल ने कहा विभाग इस बारे में फैसला करेगा। वे यहां इंडियन चैंबर्स ऑफ कामर्स के एक कार्यक्रम में अलग से पत्रकारों से बात कर रहे थे।

सरकार हाल में हुई कोयला खदानों की नीलामी में से नौ खदानों की बोलियों की फिर से जांच कर रही थी। इनमें वे कोयला ब्लॉक भी हैं जिनमें जेएसपीएल और बाल्को सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरीं। कोयला सचिव अनिल स्वरूप ने शुक्रवार रात ट्वीट कर कहा था कि गारे पाल्मा चार-एक, चार-दो, चार-तीन और तारा कोयला खदानों के लिए बोलियां स्वीकार नहीं की गर्इं।

जेएसपीएल इनमें से गारे पाल्मा चार-2, गारे पाल्मा चार-3 और तारा कोयला ब्लॉक के लिए सफल बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी जबकि भारत एल्यूमीनियम कंपनी (बाल्को) ने गारे पाल्मा चार-1 के लिए बोली लगाई। अनिल स्वरूप ने कहा कि चार को छोड़कर अन्य पांच ब्लॉक के लिए बोलियों को स्वीकार कर लिया गया है।

इस तरह की रिपोर्ट आई थी कि कुछ बोलीदाता संबंधित खदानों के दाम कम रखने के लिए आपस में सांठगांठ कर सकते हैं। स्वरूप ने इससे पहले कहा था कि कोयला खदानों की दूसरी अनुसूची में हम चार कोयला खदानों को देख रहे हैं जबकि तीसरी अनुसूची में हम पांच को देख रहे हैं। प्रथम दृष्टया हमें लगा कि इसका पुनरीक्षण होना चाहिए। इसलिए इसकी फिर से जांच की गई, बस यही बात है। इसके अलावा मर्की मंगली-तीन कोयला ब्लॉक जिसके लिए बीएस. इस्पात ने सबसे ऊंची बोली लगाई की बोलियों की भी फिर से जांच हुई।

अनिल स्वरूप ने हालांकि, इस बात पर जोर दिया कि सरकार मामले में साठगांठ अथवा इस तरह की अन्य बातों की जांच नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि मैंने इस मामले में आम तरीके से अलग दिखने की बात की है। एक प्रक्रिया है, पैटर्न है। अगर कोई इससे बाहर दिखता है तो उसमें जांच की जरूरत है। इसमें सांठगांठ है कि नहीं, इस बारे में अभी मैं कुछ नहीं कह सकता। हम इसकी जांच भी नहीं कर रहे हैं। हम केवल यही देख रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में क्या कुछ पैटर्न से हटकर हुआ है, इसकी क्या वजह है और उसके बाद ही हम कुछ कह सकेंगे।

सरकार ने अब तक कुल 33 कोयला खदानों की नीलामी की है। यह नीलामी दो किस्तों में की गई। पहली किस्त में 19 कोयला खदानों की नीलामी की गई जबकि दूसरी किस्त में 14 कोयला खदान नीलामी के लिए रखे गए।

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