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आसान है घर बैठे टैक्स रिटर्न भरना, सही फॉर्म चुनें और ध्यान रखें इन डिटेल्स का

ऑनलाइन तरीके से आईटीआर भरना बहुत आसान है और आप खुद इसे भर सकते हैं, बस जानिए ये जरूरी डीटेल्स।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

टैक्स रिटर्न भरना अमूमन सभी लोगों के लिए जरूरी होता है। वहीं कई लोग टैक्स रिटर्न भरने से बचने की कोशिश करते हैं क्योंकि यह बड़ा ताम-झाम वाला काम लगता है। ऐसे में जानते हैं कि आप इनकम टैक्स रिटर्न भरने में टैक्स विभाग के ई-आईटीआर की सुविधा का लाभ कैसे ले सकते हैं। आईटीआर रिटर्न भरना फायदेमंद होता है क्योंकि इससे टीडीएस रिफंड का क्लेम करना मुमकिन हो जाता है। साथ ही ऐसा करने से इनकम का प्रूफ बनता है जिससे लोन मिलने में आसानी होती है। वहीं लॉस कैरी फॉरवर्ड करने और वीजा अप्लाई करने के कामों में रिटर्न भरने से आसानी होती है और रिफंड क्लेम करने के लिए ये जरूरी होता है।

आप आसानी से incometaxindiaefiling.gov.in पर जाकर अपना टैक्स रिटर्न भर सकते हैं। इसके लिए आपका सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि रिटर्न फॉर्म कितने तरह के होते हैं। रिटर्न भरने के कई फॉर्म होते हैं लेकिन इनमें भी मुख्य रूप से 9 फॉर्म ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं जिनके बारे में जानकारी लेना जरूरी है। इनमें आईटीआर-1 (सिंपल), आईटीआर-2, आईटीआर-2ए, आईटीआर-3, आईटीआर-4, आईटीआर-4एस (सुगम), आईटीआर-5, आईटीआर-6 और आईटीआर-7 आदि रिटर्न फॉर्म होते हैं।

वहीं रिटर्न भरने के लिए कुछ जरूरी डॉक्युमेंट्स का होना भी जरूरी है। इनमें पैन नंबर, बैंक स्टेटमेंट, एक्जेंप्ट इनकम का ब्यौरा, फॉर्म 16/16ए, कैपिटल गेन्स का ब्यौरा (ऑप्शनल), विदेश में संपत्ति का ब्यौरा (ऑप्शनल) और मूवेबल-नॉनमूवेबल संपत्ति का ब्यौरा देना जरूरी होता है। वहीं जिनकी इनकम 50 लाख रुपये (सालाना) से ज्यादा है उनके लिए मूवेबल-नॉनमूवेबल एसेट्स का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है।

किसकी क्या है जरूरत
सभी को अलग-अलग तरह के फॉर्म भरे की जरूरत होती है। आईटीआर-1 की जरूरत उन्हें होती है जो सैलरी, पेंशन या ब्याज से अपनी इनकम कमाते हैं। इसके साथ ही एक हाउस प्रॉपर्टी से इनकम, 5000 तक की कृषि इनकम (एक्जेंप्ट इनकम) और दूसरे जरिओं से अपनी इनकम बनाने वालों के लिए आईटीआर-1 के तहत रिटर्न भरना जरूरी है। इसका बाद आता है आईटीआर-2ए। इस फॉर्म को भरने की जरूरत सैलरी, पेंशन और ब्याज आय के साथ कृषि आय (5000) से ज्यादा वालों को होती है। वहीं किसी एक हाउसिंग प्रॉपर्टी से ज्यादा सोर्स, हॉर्स-रेसिंग या लॉटरी से इनकम होने पर फॉर्म आईटीआर-2ए का इस्तेमाल कर रिटर्न फाइल किया जाता है। वहीं आईटीआर-2ए की श्रेणी में आने वालों के अलावा कैपिटल गेन्स/लॉस और विदेशी संपत्ति, विदेशी आय के जरिए से जिन्हें इनकम होती है, उन्हें फॉर्म आईटीआर-2 भी भरना पड़ता है।

क्या होता है शेड्यूल एएल
एएल का पूरा मतलब होता है एसेट्स और लायबिलिटीज। हर रिटर्न फॉर्म में शेड्यूल एएल का कॉलम जोड़ा गया है। 50 लाख से ज्यादा की इनकम वालों को इसकी जानकारी देना जरूरी होता है। इसमें जमीन,घर, बैंक डिपॉजिट, कैश इन हैंड, इंश्योरेंस पॉलिसी, शेयर्स, सिक्योरिटीज, गहने, बुलियन, एयरक्राफ्ट या यॉर्ट, आर्टवर्क और संपत्ति जुटाने के लिए कोई कर्ज लिया हो, उसकी जानकारी देनी होती हैं।

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