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सब्ज़ियां और ईंधन सस्ता होने से मुद्रास्फीति शून्य पर

प्याज, अन्य सब्जियों व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में गिरावट से नवंबर में थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति शून्य पर आ गई। यह थोक मुद्रास्फीति का साढ़े पांच साल का न्यूनतम स्तर है और इससे रिजर्व बैंक पर वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में कटौती का दबाव और बढ़ गया है। थोक मूल्य सूचकांक […]
Author December 16, 2014 12:28 pm
थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रस्फीति इस वर्ष अक्तूबर में 1.77 प्रतिशत और पिछले वर्ष नवंबर में 7.52 प्रतिशत थी। (फ़ोटो-रॉयटर्स)

प्याज, अन्य सब्जियों व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में गिरावट से नवंबर में थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति शून्य पर आ गई। यह थोक मुद्रास्फीति का साढ़े पांच साल का न्यूनतम स्तर है और इससे रिजर्व बैंक पर वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में कटौती का दबाव और बढ़ गया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित यह मुद्रास्फीति एक महीना पहले अक्तूबर में 1.77 प्रतिशत और पिछले वर्ष नवंबर में 7.52 प्रतिशत पर थी।

सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक सब्जियों विशेषरूप से प्याज, खाद्य तेल, पेट्रोल और डीजल कीमतों में गिरावट की वजह से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में तेज गिरावट आयी है।

लगातार छह माह से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट का रुख है। थोक मुद्रास्फीति के शून्य पर आने के साथ ही उद्योग जगत की ब्याज दरों में कटौती की मांग और तेजी हो गई है। केंद्रीय बैंक ने इस साल जनवरी से नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

इससे पहले इसी महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति में गिरावट का रुख जारी रहता है, और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिये सरकार कदम उठाती है तो अगले साल की शुरुआत में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति करीब तीन साल के न्यूनतम स्तर 0.63 प्रतिशत पर आ गई। खाद्य मुद्रास्फीति में मई से गिरावट का दौर जारी है।
ईंधन और बिजली वर्ग की कीमतों में नवंबर में सालाना आधार पर 4.91 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गयी। वर्ष 2009 के बाद इस वर्ग की कीमतों का यह न्यूनतम स्तर है।
ऐसा शायद पहली बार हुआ है जबकि थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति ठीक शून्य प्रतिशत पर है। थोकमूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इससे पहले जुलाई 2009 में शून्य से 0.3 प्रतिशत नीचे चली गई थी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में प्याज की थोक कीमतें सालाना आधार पर 56.28 प्रतिशत घटीं जबकि अक्तूबर में इनमें एक साल पहले की तुलना में 59.77 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। सब्जियों की कीमत 28.57 प्रतिशत घटी।

अंडा, मांस मछली जैसे प्रोटीन युक्त उत्पादों की कीमतें नवंबर में सालाना आधार पर 4.36 प्रतिशत बढ़ी, जबकि आलू में मुद्रास्फीति 34.10 प्रतिशत रही। चीनी, खाद्य तेल, पेय पदार्थों और सीमेंट जैसे विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति नवंबर में घटकर 2.04 प्रतिशत रह गई जो इससे पिछले महीने 2.43 प्रतिशत थी। नवंबर में खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों में रिकॉर्ड गिरावट आई और यह 4.38 फीसद पर आ गई।

उद्योग मंडल एसोचैम ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों के बाद औद्योगिक वस्तुओं की मांग व वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में कटौती की जोरदार तरीके से वकालत की है।

वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने मुद्रास्फीति आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि पूरी दुनिया में आर्थिक वृद्धि कमजोर बनी हुई है यही वजह है कि केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मुद्रास्फीति नरम रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह देखना है कि रिजर्व बैंक अब इन सब मुद्दों से किस तरह से निपटता है। रिजर्व बैंक इस मामले में काफी सतर्क है। वह इन सभी स्थितियों पर गौर कर रहे हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि वह सही समय पर कदम उठायेंगे।’’

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  1. Soniya Ray
    Dec 17, 2014 at 12:41 pm
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