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नोटबंदी के बाद भी लोकप्रिय बनी मोदी सरकार, मूडीज ने जताई भारत की GDP 7.5% रहने की उम्मीद

मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है और सरकार के सुधारों को गति देने से इसे आठ प्रतिशत की दर पाने में करीब चार वर्ष का समय लगेगा।
मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने अपनी ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रपट में कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि नोटबंदी के बावजूद सरकार की लोकप्रियता बनी हुई है।

मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है और सरकार के सुधारों को गति देने से इसे आठ प्रतिशत की दर पाने में करीब चार वर्ष का समय लगेगा। मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने अपनी ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रपट में कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि नोटबंदी के बावजूद सरकार की लोकप्रियता बनी हुई है। इसमें कहा गया है, ‘‘हम भारत में मामूली से अधिक वृद्धि की उम्मीद है। हमारे अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी और 2018-19 में यह 7.7 प्रतिशत रह सकती है।

वित्त वर्ष 2016-17 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही। हालांकि मूडीज का कहना है कि बैंकों के फंसे हुए कर्ज की समस्या को यदि नहीं सुलझाया जाता है तो निवेश गतिविधियों पर असर पड़ेगा क्योंकि उसके लिए रिण को संकुचित करना होगा। साथ ही यह आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव डालेगा। रपट के अनुसार कुल मिलाकर भारत की आर्थिक वृद्धि दर को आठ प्रतिशत तक पहुंचने में तीन से चार वर्ष का वक्त लगेगा। इससे पहले इसी सप्ताह में विश्वबैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।

आपको बता दें कि कुछ दिन पर पहले ही हांगकांग ने मूडीज की रेटिंग घटाए जाने को लेकर पलटवार किया था। हालांकि मूडीज ने कहा था कि हांगकांग अब अधिक से अधिक चीन के साथ जुड़ रहा है। मूडीज द्वारा पिछले तीन दशक में पहली बार चीन की की रेटिंग घटाई गई है। उसके कुछ घंटों के बाद ही हांगकांग की रेटिंग को भी एजेंसी ने कम किया है। बढ़ते कर्ज और धीमी पड़ती उसकी आर्थिक वृद्धि के चलते मूडीज ने चीन की रेटिंग कम की है। मूडीज ने यह फैसला ऐसे समय किया है जब चीन अपने अनियमित और जोखिमपूर्ण कर्ज की सफाई करने में लगा है। यह कर्ज पिछले कई सालों तक चीन की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाता रहा है। हालांकि कुछ विश्लेषकों को चीन की कर्ज लेते रहने की आदत के छूटने को लेकर आशंका है। बीजिंग ने हालांकि, मूडीज की उसकी रेटिंग कटौती को खारिज किया है।

चीन का कहना है कि मूडीज ने उसके जोखिम आकलन के लिए जो तरीका अपनाया है वह ठीक नहीं है। हांगकांग की रेटिंग को कम करते हुए मूडीज ने कहा है कि इस शहर और चीन के बीच जुड़ाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हांगकांग में बैंक चीन से जुड़े कर्ज को लेकर अधिक लिप्त हैं। हांगकांग के शेयर बाजारों ने भी शंघाई और दूसरे राज्यों से गठबंधन किया है। एजेंसी ने कहा है कि हांगकांग का चीन के वन बेल्ट वन रोड कार्यक्रम के साथ जुड़ना भी इसकी अर्थव्यवसथा और वित्तीय प्रणाली को चीन की मुख्यभूमि के और नजदीक लाता है।

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