December 03, 2016

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नरेंद्र मोदी ने बाजार से चीनी सामान को बाहर रखने के लिए अपनाया नया तरीका

भारत अब चीन को उसके सामान पर ड्यूटी फीस में छूट देने में देरी और कटौती कर सकता है। ऐसा चीन के साथ व्‍यापार में कमी के चलते किया जा सकता है।

भारत अब चीन को उसके सामान पर ड्यूटी फीस में छूट देने में देरी और कटौती कर सकता है।

चीनी सामान की भारत में बिक्री को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नया तरीका अपनाया है। भारत अब चीन को उसके सामान पर ड्यूटी फीस में छूट देने में देरी और कटौती कर सकता है। ऐसा चीन के साथ व्‍यापार में कमी के चलते किया जा सकता है। हालांकि अभी तक ऐसा तय नहीं किया गया है कि कौनसे सामान पर छूट कम की जाएगी। लेकिन बताया जाता है कि एक नेगेटिव लिस्‍ट बनाई जाएगी और इसमें शामिल वस्‍तुओं पर सीमित या ना के बराबर छूट दी जाएगी। वाणिज्‍य मंत्री निर्मला सीतारमण फिलीपींस में तीन-चार नवंबर को रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनॉमिक पार्टनरशिप(आरसीईपी) की मंत्री लेवल की बैठक में इस पर बातचीत कर सकती हैं। वाणिज्‍य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार चीन का व्‍यापार दायरा काफी बड़ा है। जापान भी इससे चिंतित है। जहां तक भारत की बात है तो सभी जानते हैं कि चीन सबसे बड़ी समस्‍या हैं।

चीनी सामान का बहिष्कार करने पर चीन ने भारत को दी चेतावनी; देखें वीडियो:

सरकार का यह नया कदम चीन के साथ बढ़ते व्‍यापार दायरे को पाटने के लिए उठाया गया है। साल 2015-16 में भारत ने चीन में 9 बिलियन डॉलर का निर्यात किया था। जबकि उसका चीन से आयात 61.7 बिलियन डॉलर का था। इस तरह से भारत के निर्यात और आयात का अंतर 52.7 बिलियन डॉल रहा। अधिकारियों के अनुसार कुछ सामानों की नेगेटिव लिस्‍ट बनाई जाएगी। अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है लेकिन विचार चल रहा है। भारत में ड्यूटी रेट की तीन स्‍तरीय ढांचा है और सरकार इसे दुरुस्‍त करना चाहती है। लेकिन चीन के साथ व्‍यापार के दायरे को पाटने के लिए उसके पास यही उम्‍मीद की किरण है।

रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनॉमिक पार्टनरशिप के तहत 16 देशों के बीच निवेश, व्‍यापार, तकनीकी सहयोग और विवादों के निपटारे को लेकर समझौता है। इसमें दक्षिण पश्चिम एशिया के 10 देशों के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया और न्‍यूजीलैंड भी शामिल हैं।

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First Published on November 2, 2016 11:03 am

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