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इनकम टैक्‍स ज्‍यादा दे द‍िया हो तो ये है वापस पाने का तरीका

Income Tax Refund: आयकर अधिनियम के तहत, रिफंड फाइल करने वाले व्यक्ति को 31 जुलाई तक रिटर्न भरना होता है। एक्सल शीट भरकर अपलोड करके या फिर ऑनलाइन उपलब्ध फॉर्म पर डेटा जरुरी डेटा भरकर रिफंड फाइल किया जा सकता है।
Author नई दिल्ली | June 23, 2017 15:52 pm
(पीटीआई फोटो)

हर साल हम इनकम टैक्स रिफंड फाइल करते हैं, लेकिन हममे से ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि इनकम टैक्स रिफंड कैसे काम करता है। आप उस स्थिति में इनकम टैक्स रिफंड पाने के हकदार होते हैं जब आप ने सरकार को कर देयता से ज्यादा टैक्स पे कर दिया हो। वह करदाता जिसने वित्तीय वर्ष के दौरान ज्यादा टैक्स चुकाया हो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करके रिफंड के लिए दावा कर सकता है। आयकर अधिनियम के तहत, रिफंड फाइल करने वाले व्यक्ति को 31 जुलाई तक रिटर्न भरना होता है। एक्सल शीट भरकर अपलोड करके या फिर ऑनलाइन उपलब्ध फॉर्म पर डेटा जरुरी डेटा भरकर रिफंड फाइल किया जा सकता है।

आपके द्वारा फाइल किए गए आईटीआर पर दिखेगा रिफंड
इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाकर पूरा आईटीआर फॉर्म भरने के बाद आपको वैलिडेट बटन पर क्लिक करना होगा। जिसके बाद टैक्सेस पैड और वेरिफिकेशन शीट ऑटोमैटिक आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार पर रिफंड की गणना कर लेगी। रिफंड की राशि रिफंड रो में दिखाई देने लगेगी। रिफंड राशि आपके द्वारा किए गए दावे के आधार पर दिखेगी, लेकिन जरुरी नहीं कि विभाग इसे मान ले या फिर इसका भगतान कर दे। अगर आपका रिफंड अमाउंट है तो उसका भुगतान किया जाएगा। विभाग द्वारा रिटर्न प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद रिफंड तय किया जाएगा।

कैसे क्लेम करें इनकम टैक्स रिफंड
एक बार आप ने आईटीआर फाइल कर दिया और आईटीआर वेरिफाई हो गया तो उसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रिफंड की प्रक्रिया शुरू करेगा और आपके दावे की प्रमाणिकता की जांच की जाएगी। रिटर्न की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी परिणाम होगा उसकी सूचना आपको भेजी जाएगी। सूचना में इस जिक्र किया जाएगा कि आपके द्वारा किए गए दावे को मान लिया गया है या फिर रिजेक्ट कर दिया गया है। इसी तरह से अगर आप ई-रिटर्न फाइल करते हैं तो सूचना ई-मेल के जरिए भेजी जाएगी। इसके साथ ही मैसेज के जरिए भी आपको जानकारी दे दी जाएगी।

दो तरह से मिलेगा टैक्‍स रिफंड
टैक्‍सपेयर्स को रिफंड दो तरीके से मिलता है। पहला- इलेक्ट्रॉनिक क्‍लीयरिंग सिस्टम (ईसीएस) और दूसरा- चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए। रिटर्न भरने के समय ही ईसीएस का ऑप्शन मिलता है। अगर, आपने इस ऑप्शन को नहीं चुना है तो ईसीएस के जरिए रिफंड का पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा। अगर नहीं चुना है तो चेक या ड्राफ्ट से पैसा आपको भेजा जाएगा। इसके लिए आपको बैंक अकाउंट और पत्राचार का पता देना होगा।

क्या है इनकम टैक्स रिटर्न
फाइनैंशल इयर के खत्म होने के बाद ऐसे हर शख्स को इनकम टैक्स विभाग में एक फॉर्म भरकर देना पड़ता है, जिसकी सालाना आमदनी टैक्सेबल होती है। इनकम टैक्स विभाग में जमा किए जाने वाले इस फॉर्म में शख्स बताता है कि पिछले फाइनैंशियल इयर में उसे कुल कितनी आमदनी हुई और उसने उस आमदनी पर कितना टैक्स भरा। इसे इनकम टैक्स रिटर्न कहा जाता है।

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