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आयकर विभाग ने दो साल में छापों में ₹56,378 करोड़ की अघोषित आय का पता लगाया

आईसीआईजे ने जो नाम जारी किए थे उस मामले में करीब 5,000 करोड़ रुपए का पता लगाया गया है और अभियोजन के 55 मामले दायर किए गए हैं।
Author नई दिल्ली | October 1, 2016 21:36 pm
आयकर भवन

आयकर विभाग ने पिछले दो साल के दौरान विभिन्न छापों और तलाशी अभियानों के तहत 56,378 करोड़ रुपए की अद्योषित आय का पता लगाया। इसके साथ ही विभाग ने 2,000 करोड़ रुपए की नकदी भी जब्त की। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले दो साल के दौरान उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली के उन्नयन के बाद सीबीडीटी को कर रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों से 16,000 करोड़ रुपए की वसूली करने में भी सफलता मिली। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सरकार ने सत्ता में आने के तुरंत बाद कालेधन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी की सिफारिशों के अनुरूप एक तय राशि से अधिक के लेनदेन पर स्थायी खाता संख्या (पैन) नंबर का उल्लेखन करना भी अनिवार्य कर दिया है।

जेटली ने कहा कि सरकार पनामा दस्तावेजों और एचएसबीसी की सूची में सामने आए नामों पर आगे कारवाई के लिए भी कदम उठा रही है। उनहोंने कहा, ‘पनामा मामले में 250 संदर्भ अन्य देशों को भेजे गए हैं और इस मामले में जांच अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। जिन लोगों के नाम एचएसबीसी सूची में सामने आए थे उनके मामले में करीब 8,000 करोड़ रुपए का आकलन पूरा कर लिया गया है। 164 मुकदमे दायर किए गए हैं।’ आईसीआईजे ने जो नाम जारी किए थे उस मामले में करीब 5,000 करोड़ रुपए का पता लगाया गया है और अभियोजन के 55 मामले दायर किए गए हैं।

इस साल की शुरुआत में पनामा दस्तावेज लीक मामले में फिल्म कलाकारों और उद्योगपतियों सहित 500 लोगों के नामों का खुलासा किया गया था जिनकी विदेशी कंपनियों और इकाइयों में संपत्ति है अथवा उन्होंने निवेश किया है। इसके अलावा 2013 में खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय समूह (आईसीआईजे) ने भी 700 लोगों की सूची प्रकाशित की थी जिनके विदेशों में खाते हैं। जेटली ने कहा कि सरकार ने कालेधन की रोकथाम और उसे निकालने के लिए कानूनी ढांचा भी तैयार किया है। फेमा कानून में संशोधन किया गया है। विदेशी कालेधन के मामले में भी कानून बनाया गया है जबकि घरेलू कालेधन के मामले में बेनामी कानून में संशोधन किया गया है। भारत ने अमेरिका के साथ फाटका पर भी हस्ताक्षर किए हैं ताकि कर अपंवचन का पता लगाया जा सके। इसके अलावा मॉरीशस संधि में संशोधन किया गया है। सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए कई प्रमुख देशों के साथ संधि में संशोधन के प्रयास जारी हैं।

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First Published on October 1, 2016 9:36 pm

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