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1 अप्रैल से बदल जाएंगे इनकम टैक्स के ये जरुरी नियम, ध्यान में रखकर करें टैक्स प्लानिंग

2017-18 फाइनेंशियल ईयर के लिए टैक्स रिटर्न भरने में देरी होने पर फाइन लगेगा। 31 दिसंबर 2018 तक 5,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। 31 दिसंबर के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
Author नई दिल्ली। | March 29, 2017 15:21 pm
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया।

लोकसभा में बजट 2017-18 के तहत वित्तीय बिल पास कर दिया गया। इस बिल के पास होने के साथ ही 1 अप्रैल से इनकम टैक्स से जुड़े नियमों में भी बदलाव हो जाएगा। नए फाइनेंस बिल के पास होने के बाद कई नियमों में परिवर्तन किया गया है। इन नियमों को ध्यान में रखकर फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के लिए टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि किन-किन नियमों में बदलाव किया गया है।

1)- सालाना 2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक कमाने वालों को 10 प्रतिशत की बजाए 5 पर्सेंट टैक्स देना होगा। इससे करदाताओं को 12,500 रुपए प्रति वर्ष की बचत होगी। इसके साथ ही एक करोड़ से ज्यादा आमदनी वालों की 14,806 रुपए (सरचार्ज और सेस सम्मिलित) की बचत होगी।

2)- सालाना 3.5 लाख रुपए की आमदानी वालों को कर छूट को 5 हजार से घटाकर 2,500 रुपए कर दिया गया है। टैक्स दर और टैक्स रीबेट में हुए बदलाव के चलते अब 3.5 लाख रुपये वार्षिक आय वालों को महज 2,575 रुपये का टैक्स अदा करना पड़ेगा। पहले उन्हें 5,150 रुपये बतौर टैक्स अदा करना पड़ता था।

3)- 50 लाख से 1 करोड़ रुपए सालामा कमाने वालों को टैक्स लेवी के रूप में 10 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा। सुपर रिच ( 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले) श्रेणी वालों को 15 फीसदी सरचार्ज देना होगा।

4)- 2017-18 फाइनेंशियल ईयर के लिए टैक्स रिटर्न भरने में देरी होने पर फाइन लगेगा। 31 दिसंबर 2018 तक 5,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। 31 दिसंबर के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। छोटे टैक्स पेयर्स (5 लाख रुपये तक इनकम) के लिए यह पेनाल्टी 1,000 रुपये की होगी।

5)- अब महज 2 साल पुरानी अचल संपत्ति टैक्स के दायरे में आएगी। सरकार पहले 3 साल पुरानी संपत्ति को लॉन्ग टर्म मानती थी। नए नियम के तहत 2 साल पुरानी संपत्ति को बेचने पर 20 पर्सेंट की दर से टैक्स लगेगा। फिर से निवेश करने की स्थिति में वह छूट का हकदार होगा।

6)- सालाना 5 लाख रुपए से अधिक टैक्सेबल इनकम वाले व्यक्तिगत करदाताओं को अब एक पेज का ही टैक्स रिटर्न फॉर्म भरना होगा। (बिजनस इनकम से अलग) पहली बार इस कैटिगिरी के तहत रिटर्न फाइल करने वाले लोगों की स्क्रूटनी नहीं होगी।

7)- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के कारण पूंजीगत लाभ पर कम भुगतान किया जाएगा। लागत के सूचीकरण का आधार वर्ष को 1 अप्रैल 1981 से बदलकर 1 अप्रैल 2001 कर दिया गया है। इससे संपत्ति बेचने पर कम लाभ प्राप्त होगा।

8)- राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश पर 2017-18 से टैक्स राहत नहीं मिलेगी। हालांकि जिन लोगों ने 1 अप्रैल 2017 से पहले ऐसे निवेश पर छूट क्लेम कर लिया है तो उन्हें अगले 2 साल तक छूट का लाभ दिया जाएगा।

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