December 08, 2016

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सुगमता के दावे खोखले, बैंकरों ने दबी जुबान से कहा, जल्द सामान्य नहीं होंगे हालात

एटीएम से धन निकासी की सुगमता के तमाम दावे शुक्रवार को खोखले साबित हुए। दो दिन के अंदर इनमें नई करेंसी नहीं डाली जा सकी। ज्यादातर एटीएम दिन भर खाली रहे। बैंकों की स्थित गुरुवार की अपेक्षा ज्यादा बुरी रही।

Author November 12, 2016 01:57 am

एटीएम से धन निकासी की सुगमता के तमाम दावे शुक्रवार को खोखले साबित हुए। दो दिन के अंदर इनमें नई करेंसी नहीं डाली जा सकी। ज्यादातर एटीएम दिन भर खाली रहे। बैंकों की स्थित गुरुवार की अपेक्षा ज्यादा बुरी रही। लंबी-लंबी कतारें और अफरातफरी की स्थिति रही। कनाट प्लेस स्थित डीईयूटीएससीएचई बैंक ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के आदेशों की परवाह किए बिना सुबह 11 बजे से नगदी बदलना बंद कर दिया। बता दें कि यह बैंक कार्यशैली में कुछ अलग सेवा प्रदान करने का दावा करता है। 2008 में बेस्ट निजी बैंक का तमगा वाला यह बैंक कारपोरेट और विदेशी ग्राहकों को ताज्जुब देता रहा है। शुक्रवार को भी इसकी झलक दिखी। पैसे दिन भर स्वीकार किए गए, लेकिन भारतीय नोट नहीं बदले गए। केवल धनराशि जमा करने और नए खाता खोलने वालों को टोकन के जरिए बैंक में प्रवेश की इजाजत दी गई।

 
विदेशी व कारपोरेट ग्राहकों की आवभगत में लगी बैंक की महिला कर्मचारियों ने जनसत्ता के इस बाबत सवाल पर पहले यह कह कर पल्ला झाड़ा कि नोट बदलने वाला कोई है ही नही! फिर ग्राहकों की मौजूदगी साबित होने पर बैंक की अधिकारी मोनिका ने इस संवाददाता से नगदी न होने की बात कही। इससे कुछ कदम दूर इनर सर्किल स्थित एसबीआइ के एसएमई शाखा में भी पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा। पांच घंटे के बाद भी कई लोगों का नंबर यहां नहीं आया। बैंक के कर्मचारी स्टाफ की कर्मी का रोना रोते रहे। लोगों की शिकायत थी कि केवल दो काउंटर इस बाबत अधिकृत थे, उनमें से एक पर काफी धीमी गति से काम चलता रहा। प्रबंधक की दलील थी कि अब सॉफ्टवेयर के जरिए डाटा साथ-साथ दर्ज किया जा रहा है, इसलिए निपटान में देरी हो रही है। बहरहाल, शुक्रवार को बैंको में सभी सरकारी दावे धराशायी नजर आए।

फिर से शुरू हो जाएगा काला धंधा
एसबीआइ के संसद मार्ग शाखा में गुरुवार की अपेक्षा शुक्रवार को नगदी बदली में ज्यादा दिक्कते आर्इं। जनसत्ता के सवाल पर शाखा के अधिकारियों ने कहा-दरअसल पहले लोगों को पता था कि वे एक ही बार 4000 की राशि बदल सकते हैं। लेकिन जब उन्हें यह पता चला कि वे यह रोज बदल सकते हैं तो फिर दोबारा बैंकों की ओर चल पड़े। उन्होंने नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा-4000 रुपए अदला-बदली के मुद्द्े पर दुविधा में है। अगर प्रति व्यक्ति को रोज 4000 तक के पुराने हजार-पांच के नोट बदलने की छुट 50 दिनों तक दी जाएगी तो कालेधन को दोबारा कालेधन में बदलने के लिए एक ही व्यक्ति रोज लाइन लगाएगा। इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी और काले धंधे में लगे लोग दोबारा काला करने के धंधे में लग जाएंगे।

यह भीड़ छटने वाली नहीं है…
मालूम हो कि 4000 रुपए की अदला बदली योजना पर भ्रम की स्थित थी। आरबीआइ ने अपने विज्ञापन में इसका खुलासा नहीं किया कि यह अदला-बदली कितनी बार होगी, कब तक होगी? इसका लाभ आम लोग से ज्यादा काला धन खपाने वाले उठा रहे हैं। एक दूसरे अधिकारी ने कहा- एक आम व्यक्ति के पास कितने बड़े नोट हो सकते हैं? दस, बीस या पचास हजार तक के! जब खाते में जमा करने की सुविधा शुरू कर दी गई तो दस, बीस हजार से ज्यादा की राशि को बदलने के बाद रोक की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। एक दूसरे अधिकारी ने कहा-हमें जो निर्देश है उसका पालन किया जा रहा है। यह भीड़ छटने वाली नहीं है। इसकी समीक्षा जरूरी है। क्योंकि 50 दिन में अलग-अलग केंद्रों से अलग-अलग आइडी से एक व्यक्ति रोज 4000 की राशि बदले तो दो लाख की राशि को वो सफेद कर सकता है।
शुक्रवार सुबह से ही एटीएम मशीनों के पास पैसा निकालने वाले लोगों की लाइनें लगी थीं। लेकिन ज्यादातर एटीएम ने लोगों को निराश किया। लोग कई घंटे बैंकों के बाहर नकदी लेने के लिए लाइन में खड़े रहे। एटीएम मशीनों के बाहर जुटी भीड़ में लोग इससे काफी नाराज दिखे।

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First Published on November 12, 2016 1:55 am

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