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इन कंडीशन्स में आप तुरंत निकल सकते हैं EPF से पैसे, इंश्योरेंस की भी सुविधा

शादी, बच्चों की एजुकेशन, मकान बनवाने या जमीन खरीदने के लिए आप ईपीएफ खाते से राशि निकाल सकते हैं। लगातार सात साल तक काम करने के बाद ईपीएफ से 50 फीसदी तक राशि इसके लिए निकाल सकते हैं।
Author नई दिल्ली | December 27, 2016 11:10 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर सरकार पर सरकार ने ब्याज दर को घटाकर 8.65 पर्सेंट कर दिया है। पहले यह 8.8 फीसदी था, जि पर 0.15 प्रतिशत की कमी की गई है। हालांकि निवेश के लिहाज से ईपीएफ अभी भी फायदेमंद है। ईपीएफओ के 31, मार्च 2016 के आकंड़ों के मुताबिक 3,76,22,440 सदस्य, ईपीएफ में अपना योगदान कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक आपके मूल वेतन से 12 फीसदी राशि को ईपीएफ खाते में जाती है। इतनी ही राशि नियोक्ता (Employer) भी अपनी ओर से कर्मचारियों के खाते में डालते हैं। ईपीएफ से पैसे निकालने को लेकर बहुत तरह की दुविधाएं रहती है। हम अपना पैसा कैसे, कब तथा किन आपात स्थितियों में निकाल सकते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं किन कंडीशन में आप तुरंत ईपीएफ अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं।

जरूरत पर निकाल सकते हैं राशि
शादी, बच्चों की एजुकेशन, मकान बनवाने या जमीन खरीदने के लिए आप ईपीएफ खाते से राशि निकाल सकते हैं। लगातार सात साल तक काम करने के बाद ईपीएफ से 50 फीसदी तक पैसे निकाले जा सकते हैं। पूरी अवधि में आप केवल तीन बार ईपीएफ अकाउंट से पैसे निकाल जा सकते हैं। लेकिन उस स्थिति में भी आप कुल जमा राशि के 50 पर्सेंट से ज्यादा नहीं निकाल सकते। हालांकि कुछ स्थितियों में ईपीएफ से तुरंत पैसे निकालने की भी सुविधा है। नौकरी छूट जाने की स्थित में लगातार दो माह तक बेरोजगार बैठने, विदेश में नौकरी के लिए जाने या बसने और लड़कियों के मामले में शादी या मां बनने की वजह से नौकरी छोड़ने या ईपीएफओ सदस्य की मृत्यु होने की स्थित में ईपीएफ में जमा राशि तुरंत निकालने की सुविधा है।

ईपीएफ पर इंश्योरेंस की भी सुविधा
ईपीएफओ एम्पलॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLIS) के तहत अपने सदस्यों को बीमा कवर भी देता हैं। इसके लिए नियोक्ता को मूल वेतन का 0.50 पर्सेंट ईपीएफओ को देना होता है। इसके तहत आपको मूल वेतन का 30 गुना बीमित राशि का समूह बीमा कवर मिलता है। नियोक्ताओं के लिए यह स्वैच्छिक है कि वह अपने कर्मचारियों को समूह बीमा कवर दें। लेकिन नियोक्ता समूह बीमा कवर देते हैं तो उसमें यह शर्त होती है कि उसमें मिलने वाला कवर ईपीएफओ की ओर दिए जाने वाले कवर से कम नहीं होना चाहिए।

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