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एमसीएलआर में गिरावट की उम्मीद कम, इसलिए होम लोन सस्ते होने के भी कम हैं आसार

MCLR के आधार पर आधारित लोन के रेट, बेस रेट के आधार पर आधारित लोन के रेट से कम ही रहता है।
ईपीएफओ उपलब्ध कराएगा ईपीएफओ। (Representative Image)

नया होम लोन लेने वालों के लिए पिछले एक साल में होम लोन की दरें काफी कम हुई हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब होम लोन की दरें इससे ज्यादा नीचे नहीं जाएंगी। अगर होम लोन लेना है तो अब और इंतजार करने का कोई फायदा नहीं होने वाला है। क्योंकि अब आरबीआई ऐसी कोई पॉलिसी लाने पर विचार नहीं कर रहा है जिससे कि होम लोन को वर्तमान दरों से भी कम पर उपलब्ध कराया जा सके। ज्यादातर होम लोन की दरें सीमांत निधि लागत पर आधारित ऋण दर यानी एमसीएलआर से जुड़ी हैं। रिजर्व बैंक ने प्रमुख दरों में कटौती का फायदा तुरंत ग्राहकों को देने और कर्ज की दर तय करने के नियमों में पारदर्शिता लाने के लिहाज से पिछले साल अप्रैल से एमसीएलआर नाम से नई व्यवस्था लागू की थी। आईये हम आपको बताते हैं कि होम लोन सस्ते होने के क्या कारण रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा कराण आरबीआई द्वारा दरों में कटौती करना था। आरबीएल बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव आहूजा ने बताया कि आरबीआई ने अपनी फरवरी की मीटिंग में अपना रुख अनुकूल के बजाय तटस्थ स्थिति बनाने की ओर कर लिया है। इसलिए अब इसकी पॉलिसियों में रेट कट करने की उम्मीद कम है। इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक आरबीआई महंगाई के बारे में चिंतित है। इसलिए रेट कम करने की उम्मीद और भी कम हो जाती है। कोटक महिंद्रा बैंक की सीनियर इकॉनोमिस्ट उपासना भारद्वाज ने बताया कि नोटबंदी का असर यहां भी देखने को मिला। नोटबंदी के बाद कीमतों में ज्यादा कमी आई। एमसीएलआर में सबसे ज्यादा कमी नवंबर से जनवरी के बीच आई थी। भारद्वाज ने कहा कि दरों में पहले ही इतनी कटौती हो चुकी है इसलिए अब कटौती की उम्मीद बहुत कम है।

हम बताते हैं कि अब उन लोगों को क्या करना चाहिए जिनके होम लोन एमसीएलआर नहीं बल्कि बेस रेट के आधार पर हैं।  एक विशेषज्ञ ने बताया कि एमसीएलआर के आधार पर आधारित रेट, बेस रेट के आधार पर आधारित रेट से कम ही रहता है। लोन लेने वाले को बेस रेट से एमसीएलआर रेट पर सिफ्ट कर लेना चाहिए। साथ ही यह भी बताया कि यह दोनों ही अलग-अलग गणनाओं पर आधारित हैं और भविष्य में दोनों के बीच का अंतर कम हो सकता है। यह बेस रेट में गिरावट के कारण हुआ था। बेस रेट में उतनी गिरावट नहीं आई थी जितनी कि एमसीएलआर में आई थी। इसलिए यहां फिर गिरावट की उम्मीद है।

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