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जानिए कैसे सेक्शन 80 के जरिए पा सकते हैं अच्छे टैक्स बेनिफिट्स

वहीं बचत-कटौती का दावा करने के लिए आपको आयकर विभाग की सही धाराओं के तहत अपने निवेश की घोषणा करना जरूरी है।
प्रतीकात्मक फोटो।

बाजार में कई विकल्पों के जरिए आप टैक्स बचत के साथ ज्यादा रिटर्न पा सकते हैं। वहीं बचत-कटौती का दावा करने के लिए आपको आयकर विभाग की सही धाराओं के तहत अपने निवेश की घोषणा करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है जिसका असर कमाई कम पर पड़ता है। वहीं इन सेक्शन के जरिए आप अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं। जानते हैं इसके बारे में।

सेक्शन 80 C- इस सेक्शन का इस्तेमाल कोई भी एचयूएफ या नागरिक कर सकता है। इसके जरिए 1.5 लाख रुपये से ज्यादा कि रकम पर कटौती होती है। वहीं जो लोग 30 फीसद के टैक्स स्लैब में आते हैं वे अपने टैक्स ब्रैकिट से 45 हजार रुपये तक की बचत कर सकते हैं इस सेक्शन के जरिए कर सकते हैं (सेस के बिना)।

सेक्शन 80 CCD(1B)- ये सेक्शन आपको 50 हजार रुपये का सालाना अतिरिक्त निवेश सेक्शन 80 सी के तहत एनपीएस में करने की इजाजत देता है। वहीं एनपीएस पर रिटर्न्स की दर 6% से 15% तक की होती है। ऐसे में आप अपने टैक्स स्लैब में 15 हजार रुपये तक की छूट पा सकते हैं लेकिन यह सेस को एक्सक्लूड करके होगा।
सेक्शन 80EE- होम लोन ब्याज पर और आयकर अधिनियम के तहत धारा 24 की सीमा से ऊपर हैं तो अतिरिक्त 50000 कटौती हासिल की जा सकती है। इस धारा के तहत 15000 रुपये (सेस के बिना) की अधिकतम राशि बचा सकते हैं। इसके आलावा धारा 24 और 80EE में कटौती भी शामिल है जिस पर 75000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं (उपकर को छोड़कर)।
सेक्शन 80D- आयकर अधिनियम का ये सेक्शन स्वास्थ्य बीमा पर कटौती देता है। बीमा पर दिए गए प्रीमियम के भुगतान पर इसका लाभ उठाया जा सकता है। परिवार के मुखिया जिनकी उम्र, 60 से नीचे है – और पति या पत्नी और आश्रित बच्चों सहित हैं तो वे 25,000 रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं। वहीं अगर आपके माता पिता, जो 60 साल के ऊपर है, तो, उस स्थिति में, आप 30 हजार रुपये तक का दावा कर सकते हैं।

सेक्शन 80TTA– इस सेक्शन को बैंक के बचत खाते पर ब्याज से हुई इंकम की कटौती के लिए बनाया गया है। कटौती एफडी या आरडी से ब्याज पर उपलब्ध नहीं है। वहीं 10 हजार या उससे कम की कटौती इस सेक्शन के जरिए क्लेम की जा सकती है। वहीं इसके लिए आपको कटौती का दावा करने के लिए, ग्रॉस इंकम में अपने सभी ब्याज की कमाई जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए भी 80TTA के तहत कटौती का दावा है। 30% टैक्स ब्रैकेट (सेस छोड़कर ) में 3000 की अधिकतम राशि बचाई जा सकती है।

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