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क्या VAT के मुकाबले ज्यादा है GST? दूर कर लीजिए इस टैक्स से जुड़ी ये सात भ्रांतियां

राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने रविवार को गुड्स एंड सर्विस टैक्स की जटिलताओं को दूर करते हुए व्यापारियों में टैक्स से जुड़ी भ्रांतियां खत्म करने की कोशिश की।
One week of GST: जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) 30 जून से लागू किया गया था।

देश में 1 जुलाई 2017 से जीएसटी (Goods and Services Tax) लागू हो गया है। हालांकि इसके नियमों को लेकर अभी भी कई लोगों में गलतफहमी मौजूद है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने रविवार को गुड्स एंड सर्विस टैक्स की जटिलताओं को दूर करते हुए व्यापारियों में टैक्स से जुड़ी भ्रांतियां खत्म करने की कोशिश की। लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील करते हुए उन्होंने बताया कि ईमानदार करदाताओं को इसका सीधा फायदा होगा। उन्होंने रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए व्यापार करने वालों को जीएसटी से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी के कार्यान्वयन और निष्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। जीएसटी से जुड़ी 7 भ्रांतियां और उनकी सच्चाई इस प्रकार है:

भ्रांति 1. सभी तरह के बिल केवल कंप्यूटर / इंटरनेट जेनरेटेड होने चाहिए।
सच्चाई: हाथ से बनाई गई रसीद भी मान्य होगी।

भ्रांति 2 : जीएसटी के तहत व्यापार करने के लिए हर समय इंटरनेट की जरीरत है।
सच्चाई : जीएसटी का मासिक रिटर्न भरते समय ही इंटरनेट की जरूरत होगी।

भ्रांति 3 : मेरे पास provisional आईडी है लेकिन व्यापार शुरू करने के लिए फाइनल आईडी का इंतजार करना होगा।
सच्चाई : Provisional ID ही आफका फाइनल GSTIN नंबर होगा। व्यापार शुरू कर दें।

भ्रांति 4 : मैं जिस सामान का व्यापारी हूं वह पहले कर से मुक्त था, इसलिए अब मुझे व्यापार शुरू करने से पहले नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
सच्चाई : व्यापार शुरू कर सकते हैं और 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

भ्रांति 5: हर महीने तीन रिटर्न भरने होंगे।
सच्चाई : सिर्फ एक ही रिटर्न है जिसे तीन हिस्सों में भरना होगा। पहला हिस्सा डीलर को भरना होगा, दूसरा और तीसरा कंप्यूटर से ऑटो जेनरेट हो जाएगा।

भ्रांति 6: यहां तक की छोटे व्यापारियों को भी रसीद के हिसाब से रिटर्न भरना होगा।
सच्चाई : रिटेल बिजनेस (B2C) वालों को सिर्फ टोटल सेल की जानकारी देनी होगी।

भ्रांति 7 : नए जीएसटी रेट वैट के मुकाबले ज्यादा हैं।
सच्चाई : जीएसटी इसलिए ज्यादा दिखता है क्योंकि इसमें उत्पाद शुल्क (excise duty) और दूसरी तरह के छिपे हुए टैक्स भी सम्मिलित कर लिए गए हैं।

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