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विश्वबैंक की रैकिंग में 12 मुख्य सुधारों पर विचार नहीं किया गया: सरकार

विश्वबैंक की व्यापार सुगमता रैकिंग में भारत की स्थिति में कोई सुधार नहीं किए जाने पर निराशा जताते हुए भारत सरकार ने कहा कि इस रपट में सरकार द्वारा उठाए गए 12 प्रमुख सुधारों पर कोई विचार नहीं किया गया है।
Author नई दिल्ली | October 26, 2016 10:14 am
औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक

विश्वबैंक की व्यापार सुगमता रैकिंग में भारत की स्थिति में कोई सुधार नहीं किए जाने पर निराशा जताते हुए भारत सरकार ने कहा कि इस रपट में सरकार द्वारा उठाए गए 12 प्रमुख सुधारों पर कोई विचार नहीं किया गया है। विश्वबैंक की व्यापार सुगमता सूची में भारत 130वें पायदान पर है। उसके अनुसार देश ने निर्माण परमिट, रिण प्राप्त करने और अन्य मानदंडों के संदर्भ में नाममात्र या कोई सुधार नहीं किया है।
विश्वबैंक की ताजा ‘डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में भारत की स्थिति में पिछले साल के मुकाबले कोई सुधार नहीं हुआ है। विभिन्न मानदंडों के आधार पर भारत 190 देशों में 130वें पायदान पर था। हालांकि पिछले साल की रैंकिंग को संशोधित कर 131वां कर दिया गया है। इस लिहाज से देश ने एक पायदान का सुधार किया है।


औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि दर्जन भर महत्वपूर्ण सुधार सरकार ने किए हैं जिनमें दिवाला संहिता, जीएसटी, इमारत योजना की मंजूरी के लिए एकल खिड़की प्रणाली, आॅनलाइन कर्मचारी राज्य बीमा आयोग और भविष्य निधि पंजीकरण जैसे सुधार शामिल हैं। इन सभी पर विश्वबैंक ने इस साल विचार नहीं किया है। विभाग ने कहा कि वह सुधारों पर आगे काम जारी रखेगा। इसके लिए बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति, हितधारकों से बातचीत इत्यादि शामिल है।

उन्होेंने कहा कि हम विश्वबैंक के साथ मुलाकात जारी रखेंगे और उन्हें इस बात के लिए राजी करेंगे कि हमारे द्वारा किए गए इन 12 प्रमुख सुधारों को अपनी रपट में शामिल करें। सरकार व्यापार सुगमता के लिये प्रयास कर रही है और उसका लक्ष्य देश को शीर्ष 50 में लाना है।

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