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बढ़ते घाटे का दिखा असर, सरकार बेचेगी इन तीन कंपनियों की अपनी हिस्सेदारी

सरकार के लिए चिंता का कारण अगले साल बढ़ने वाले खर्चे और सरकारी घाटे पर काबू पाने के लिए रोडमैप तैयार करना है। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी घाटे को कम करके 3.5% के नीचे लाया जाये।
Author नई दिल्ली | January 30, 2016 16:25 pm
इन तीन कंपनियों की सरकारी हिस्सेदारी को बेचकर बढ़ते घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। सबसे पहले एक्सिस बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को बेचे जाने की योजना है।

अगले कुछ महीनों में सरकार तीन ब्लू चिप कंपनी एक्सिस बैंक, लार्सन एंड टर्बों और आईटीसी की अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच कर साल 2016-17 में सार्वजनिक कार्यों के लिए फंड जुटाएगी। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकारी घाटे को काबू में रखते हुए सराकरी कामकाज के बढ़े हुए खर्चे के लिए पैसा जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। इन तीन कंपनियों की सरकारी हिस्सेदारी को बेचकर बढ़ते घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। सबसे पहले एक्सिस बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को बेचे जाने की योजना है।

इस समय एक्सिस बैंक में 11.66% ,आईटीसी में 11.27% और आईटीसी में 8.18% की सरकारी हिस्सेदारी है। शुक्रवार को बीएसई में इन तीन कंपनियों के शेयर के क्लोसिंग प्राइस को देखते हुए सरकार को अपनी कुल हिस्सेदारी बेचने पर 48,658 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं। साल 2015-16 के लिए सरकार का विनिवेश आय का लक्ष्य 69,500 करोड़ रुपये है हालांकि पहले 10 महीनों में सरकार सिर्फ 13,337 करोड़ रुपये ही इक्ट्ठे कर पाई है।

इन तीन कंपनियों में हिस्सेदारी को बेचने पर सरकार को पहले भी कठोर आलोचना का सामना करना पड़ा था। अगर सिर्फ आईटीसी की बात की जाए तो सरकारी हिस्सेदारी बिकने के बाद इस कंपनी में विदेशी स्वामित्व बढ़ने का खतरा बढ़ जायेगा साथ ही कंपनी के संचालन में भारतीय नियंत्रण कम हो जायेगा। लंदन केंद्र वाली ब्रिटिश अमेरिकन तंबाकू कंपनी की अलग-अलग सहयोगी कंपनियों के आईटीसी में 30% हिस्सेदारी है। इस कंपनी का आईटीसी के प्रशासनिक कामों में पहले भी तनावपूर्ण दखल रहा है।

कई तरह के क्षेत्रों में व्यवसाय में करने वाली लार्सन एंड टर्बो में भी सरकार की हिस्सेदारी बिकने पर विदेशी हिस्सेदारी बढ़ने का खतरा बढ़ जायेगा। डिफेंस में सरकार 49% विदेशी निवेश को पहले ही हरी झंडी दिखा चुकी है। कुछ मामलों में विदेशी निवेश की सीमा 100% तक भी होने का प्रवाधान है।

अगले साल सातवे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने और वन रैंक वन पेंशन को लागू करने के कारण सरकार के खर्चें में भारी वृद्धि होने जा रही है। जिस कारण सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए सभी संभव प्रयास कर रही है। अकेले वन रैंक वन पेंशन लागू करने के कारण साल 2016-2017 में सरकारी खर्चे में 1,02,100 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा साथ ही सातवें वेतन लागू करने पर वेतन, भत्ते और पेंशन मे आये 23.55% के बढ़ोत्तरी का अतिरिक्त भार भी सरकारी खर्चे पर पड़ेगा।

सरकार के लिए चिंता का कारण अगले साल बढ़ने वाले खर्चे और सरकारी घाटे पर काबू पाने के लिए रोडमैप तैयार करना है। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी घाटे को कम करके 3.5% के नीचे लाया जाये साथ ही सकल घरेलू उत्पाद दर को अगले साल 3.9% रखा जाये।

यूटीआई के दो भागों में बंटने के बाद एसयू-यूटीआई का गठन फरवरी 2003 में किया गया था। यूटीआई दो भांगों में बंट कर यूटीआई ट्रस्टी कंपनी और एसयूयूटीआई दो अलग कंपनियां बनाई गई थी। मार्च 2012 में केंद्र सरकार ने एक प्रस्ताव को स्वीकार करके एसयूयूटीआई को बदलकर नेशनल फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी कर दिया था। कंपनी एक्ट के आधार पर जून 2012 में इस नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया गया। एसयूययूटीआई ने अपनी सभी संपत्ति और दायित्व नये कंपनी को ट्रांसफर कर दिये। एक साल बाद फैसले को वापस ले लिए गया और एसयूयूटीआई को अपनी संपत्ति की देखरेख करने की अनुमति दे दी गई।

इसके बाद मार्च 2016 में सरकार ने एक्सिस बैंक के अपने 9% हिस्सेदारी 5,557 करोड़ रुपये में बेच दी । इसी साल सरकार ने एसयूयूटीआई की संपत्ती का लेखा जोखा तैयार करने के लिए एक्सचेंज ट्रेड्ड फंड बनाया जिसने इन तीन कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी निकालने की रूप-रेखा तैयार की। इसके बाद सरकार ने निलामी बुलाकर अपनी हिस्सेदारी बेचने का प्रयास किया लेकिन तब निलामी की सहायता से सरकार फंड नहीं जुटा पायी।

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