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कृषि मंत्रालय ने किया था गेहूं की बंपर फसल का दावा, आयात शुल्क हटाकर नरेंद्र मोदी सरकार ने कर दिया शर्मिंदा

2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था
गेहूं की बालियां (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है)

ठीक गेहूं की बोवाई के समय केंद्र सरकार ने गेहूं से आयात शुल्क हटाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कृषि मंत्रालय लगातार कहता आ रहा है कि 2015-16 में भारत में बड़ी स्तर पर गेंहू की पैदावार हुई थी। इसके अलावा मंत्रालय ने अगले साल की पैदावार का अनुमान भी काफी ज्यादा बताया था। 2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था, यह 2014-15 में 86.53 मिलियन टन से काफी ज्यादा था।

पीटीआई ग्राफिक्स। पीटीआई ग्राफिक्स।

सूत्रों के मुताबिक सरकार के आयात शुल्क हटाने के फैसले के बाद देश में 2016-17 में गेहूं का आयात 60 लाख टन को पार करने की संभावना है जो निजी व्यापारियों के जरिये पिछले 10 साल में होने वाला सर्वाधिक आयात है। अब तक भारतीय व्यापारी करीब 35 लाख टन गेहूं के आयात के लिए अनुबंध कर चुके हैं जबकि 18 लाख टन गेहूं देश में आयात किया जा चुका है। सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में गेहूं पर आयात शुल्क हटाने संबंधी अधिसूचना सदन के पटल पर रखी थी। उन्होंने कहा था कि 8 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना के अनुसार, गेहूं पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने इससे पहले इस साल सितंबर में गेहूं के आयात पर शुल्क 25 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत कर दिया गया था।

बता दें कि किसी भी वस्तु पर आयात शुल्क इसलिए लगाया जाता है ताकि आयातित वस्तु का दाम भी देसी उत्पाद के बराबर का हो जाए। इस तरह से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है तथा देसी उत्पादकों के हितों को चोट भी नहीं पहुंचती है। गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक गेहूं की पैदावार उत्तर प्रदेश और पंजाब में होती है। गेहूं के उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर तथा पंजाब दूसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश की 76 प्रतिशत आबादी खेती पर ही निर्भर है, वहीं पंजाब में यह आंकड़ा 63 फीसदी का है।

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