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आधार जोड़ने की मियाद बढ़ा कर 31 दिसंबर करेगा केंद्र

विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के लिए आधार उपलब्ध कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर वह 31 दिसंबर करेगी।
Author नई दिल्ली | August 31, 2017 01:50 am
सरकार ने आगामी एक जुलाई से करदाताओं के मौजूदा आधार नंबरों को स्थायी खाता संख्या (पैन) से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है।

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के लिए आधार उपलब्ध कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर वह 31 दिसंबर करेगी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव राय और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर के तीन सदस्यीय खंडपीठ को अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सूचित किया कि मौजूदा 30 सितंबर की अंतिम समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर की जाएगी। इससे पहले इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य करने संबंधी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं ने इसका उल्लेख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया है और ऐसी स्थिति में अब आधार से संबंधित याचिकाओं पर उचित पीठ को सुनवाई शुरू करनी चाहिए। दीवान ने जब इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार देने की 30 सितंबर की समयसीमा का उल्लेख किया तो अटार्नी जनरल ने कहा कि सरकार इसे 31 दिसंबर तक बढ़ा देगी।

वेणुगोपाल ने कहा-हमने (केंद्र) कहा है कि हम इसे 31 दिसंबर तक बढ़ाएंगे। पीठ ने इसके बाद कहा कि आधार के मुद्दे पर याचिकाओं पर नवंबर के पहले हफ्ते में सुनवाई की जाएगी। कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। अटार्नी जनरल कह रहे हैं कि इसे बढ़ाया जाएगा। इसे नवंबर के पहले हफ्ते में सूचीबद्ध किया जाए। दीवान ने निजता के अधिकार के मामले में न्यायमूर्ति नारिमन के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि एक जज ने कहा कि आधार से संबंधित मामलों को तीन सदस्यीय पीठ के पास निर्णय के लिए भेज दिया जाए। हालांकि अटार्नी जनरल ने पीठ से अनुरोध किया कि इसमें शामिल मुद्दों के महत्व को देखते हुए इसे पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजा जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 दिसंबर की जाएगी। इसलिए इस पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है और इस पर नवंबर में विचार किया जा सकता है। दीवान ने वेणुगोपाल के इस सुझाव का विरोध नहीं किया और कहा कि यदि नवंबर में इस पर सुनवाई होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

 

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