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भारत में सोने की मांग में 28% की भारी गिरावट, टूटा आठ साल का रिकॉर्ड

चालू वर्ष की तीसरी तिमाही में सोने की मांग 28% घटकर 194.8 टन रह गई है। 2008 के बाद इस तिमाही में यह सबसे कम है।
सांकेतिक तस्वीर।

भारतीयों में सोने को लेकर जो उत्साह है उसमें कमी देखने को मिली है। अधिक कीमत, ग्रामीण आय में विशेष सुधार होने और नियामकीय बदलावों के कारण इस तिमाही में सोने की मांग में भारी गिरावट देखने को मिली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मांग इतनी कम रही कि इसने पिछले आठ सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। चालू वर्ष की तीसरी तिमाही में सोने की मांग 28% घटकर 194.8 टन रह गई है। 2008 के बाद इस तिमाही में यह सबसे कम है, जबकि इस दिनों में सोने की मांग सबसे ज्यादा होती है। पिछली साल इसी तिमाही में सोने की मांग 271.1 टन थी। मूल्य के हिसाब से भी जुलाई-सितंबर में सोने की मांग 12% घटकर 55,970 करोड़ रुपए पर गई।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए सोने की बढ़ी कीमत काफी हद तक जिम्मेदार है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में सोने की कीमत में 30.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। डब्ल्यू्जीसी (इंडिया) के एमडी सोमसुंदरम पीआर ने कहा, ‘2015 की तीसरी तिमाही में सोने की मांग अधिक थी क्योंकि उस समय सोने की कीमत घटकर 25,586 रुपए प्रति दस ग्राम पर गई थी। इसके अलावा उत्पाद शुल्क लागू होने के बाद सराफा कारोबारियों की हड़ताल, दो लाख से अधिक की खरीद पर पैन की अनिवार्यता और आय खुलासा योजना (आईडीएस) जारी रहने के दौरान सोने की खरीद को लेकर कमजोर धारणा से भी मांग प्रभावित हुई। हालांकि कुल-मिलाकर ग्रामीण मांग उम्मीद से कम रही, लेकिन दो साल के सूखे के बाद अच्छी बारिश होने से ग्रामीण इलाकों में मांग ज्यादा कमजोर नहीं पड़ी।’

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डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कुल निवेश डिमांड 44 फीसदी बढ़कर 336 टन हो गई, क्योंकि निवेशक लगातार सोने में रणनीतिक निवेश कर रहे हैं। इंटरनेशनल मार्केट में जुलाई-सितंबर क्वार्टर के दौरान सोने की डिमांड 10 फीसदी घटी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्वार्टर के दौरान सोने की मांग घटकर 992.8 टन रह गई है, जबकि पिछले साल इस क्वार्टर के दौरान सोने की डिमांड 1,104.8 टन थी।

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