March 25, 2017

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नोटबंदी के चलते फिच ने घटाई भारत की रेटिंग, कहा- पूरी सप्‍लाई प्रभावित हुई और लोग कतार में खड़े हैं

फिच ने कहा कि हालांकि नोटबंदी के पीछे की मंशा सकारात्मक थी और व्यापक सुधार के प्रयासों को ध्यान में रखकर की गई थी।

Author January 11, 2017 20:41 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्‍त मंत्री अरुण जेटली। (Source: PTI)

फिच रेटिंग ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए भारत की रेटिंग घटाकर 6.9 फीसदी कर दी है जो कि पहले 7.4 फीसदी थी, लेकिन नोटबंदी के फायदों पर जारी अनिश्चितता के कारण इसमें कटौती की गई है। फिच रेटिंग ने मंगलवार को जारी अपनी नवीनतम द्विमासिक न्यूजलेटर में कहा, “नोटबंदी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में अल्पकालिक विघटन आई है, जिसके कारण हमें विकास दर का पूर्वानुमान घटाना पड़ा है।” इसमें आगे कहा गया, “हालांकि इस कदम से कुछ लाभ की संभावना है, लेकिन यह इतना सकारात्मक नहीं है कि सरकार के वित्तीय और मध्यम अवधि विकास दर में कोई बदलाव ला सके। नोटबंदी के असर जितने दिन तक जारी रहेगा, उतना ही इसका अर्थव्यवस्था पर असर होगा। इसलिए फिच ने 31 मार्च को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान पूर्व के 7.4 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है।” नोटबंदी से हालांकि सरकार के राजस्व में वृद्धि हुई है और बैंकों की कर्ज देने की शक्ति बढ़ी है। लेकिन फिच का कहना है, “नोटबंदी के कारण लोगों के पास नकदी की भारी कमी हो गई। दूसरी तरफ किसानों के पास भी खाद-बीज खरीदने के पैसे नहीं हैं। इससे समूची आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुए और लोगों के बैंकों की कतार में खड़े होने से उत्पादक कार्य का समय भी बरबाद हुआ।”

फिच ने कहा कि हालांकि नोटबंदी के पीछे की मंशा सकारात्मक थी और व्यापक सुधार के प्रयासों को ध्यान में रखकर की गई थी। लेकिन इससे अनिश्चित दीर्घावधि लाभ की तुलना में कहीं ज्यादा अल्पकालिक नुकसान हुआ। नोटबंदी के कारण उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि नकदी की कमी के कारण उपभोक्ताओं ने अपने खर्च में काफी कटौती की। जेएम फाइनेंसियल की रिपोर्ट में यह बातें कही गई है।

वित्तीय सेवा कंपनी ने एक बयान में कहा, “इस तिमाही की शुरुआत ज्यादातर कारोबार के लिए सकारात्मक ढंग से हुई थी। खासतौर से त्योहारों के दौरान मांग में काफी तेजी आई थी, लेकिन जैसा कि अब अच्छी तरह जगजाहिर है कि 8 नवंबर को की गई नोटबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सभी किस्म के कारोबार पर पानी फिर गया।” इसमें कहा गया, “जिन कंपनियों से हमने बात की, वे नवंबर मध्य जब नोटबंदी की गई थी की तुलना में दिसंबर के अंत में अधिक आशावादी दिखे। हालांकि हमें कमाई सीजन के अंतिम आंकड़े देखने होंगे कि क्या यह तिमाही उतना बुरा होता है जितना अनुमान लगाए गए हैं (नवंबर में 20-15 फीसदी की कमी तथा दिसंबर में 10-12 फीसदी की कमी)”

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया, “हमें बड़े पैमाने पर सपाट बिक्री (-0.9 फीसदी), एबिटा (ब्याज, कर, मूल्यहास और परिशोधन से पहले की कमाई) (-1.1 फीसदी) और समायोजित शुद्ध लाभ (0.9 फीसदी) रहने की उम्मीद है।”

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First Published on January 11, 2017 8:41 pm

  1. S
    sach
    Jan 12, 2017 at 4:24 am
    अद्भुत अदम्य जुों की परिभाषा है.....ये देश की इज्जत को मिट्टी में मिला डालता है...सूट पहन कर ये करोड़ों का , विदेश में हनीमून मनाता है.... ये इंसान नहीं है ये हैवान है... फेंकूमान..फेंकूमान...फेंकूमान... फेंकू...फेंकू...फेंकूमान....फेंकू फेंकू फेंकू मान ..... फक....फक...फक..फक... फेंकूमान......
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