December 10, 2016

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नोटबंदी-जीएसटी से साफ सुथरी होगी भारतीय अर्थव्यवस्था: अरुण जेटली

जीएसटी के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि इसके क्रियान्वयन को अगले साल 17 सितंबर के बाद नहीं टाला जा सकता। यह संवैधानिक बाध्यता है।

Author नई दिल्ली | December 2, 2016 18:46 pm
एक प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI File Photo)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार (2 दिसंबर) को कहा कि नोटबंदी से एकाध तिमाही तक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है पर यह असर लंबे समय तक नहीं रहेगा और इस कदम के साथ जीएसटी को लागू करने से एक बड़ी और साफ सुथरी अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। जेटली ने यहां एचटी लीडरशिप समिट में कहा, ‘मेरे दिमाग में इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि (अब से एक साल बाद) आपके पास एक बड़ी अर्थव्यवस्था होगी जिसमें जीडीपी वृद्धि ऊंची होगी और पहले से साफ सुथरा जीडीपी होगा। आपके पास एक व्यापक कर आधार वाली अर्थव्यवस्था जिसमें बैंकों में काफी धन जमा होगा और संभवत: ऐसी अर्थव्यवस्था होगी जिसमें ब्याज दर भी तर्कसंगत स्तर पर होगी। इस लिहाज से जहां तक जीडीपी की बात है ये सभी बातें मिलकर बेहतर योगदान करेंगी।’

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के अमल में आने से अर्थव्यवस्था और सामाजिक तंत्र दोनों में ही बड़ा बदलाव दिखेगा। ‘व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि नये नोट छापने का काम पूरा होने और जीएसटी लागू हो जाने के बाद कारोबार और भारत में जीवन जीने के तौर तरीकों में व्यापक बदलाव आयेगा।’ जेटली ने कहा कि तब नये परिवेश में ज्यादा खर्च डिजिटल तरीकों से होगा। अधिक सक्षम कर प्रशासन होगा जिसमें कर चोरी मुश्किल होगी। नई व्यवस्था में हर स्तर पर लेनदेन का पता होगा। नोटबंदी के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में जेटली ने कहा, ‘जब भी आप कोई बदलाव करते हैं तो कुछ उथल पुथल तो होती ही है। मुझे नहीं लगता कि यह ज्यादा समय तक रहेगा। इसका एक तिमाही के करीब असर दिख सकता है, उसके बाद अगले 12 से 15 तिमाहियों में इसका निश्चित ही फायदा मिलेगा।’

नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था के कुछ रुझानों का जिक्र करते हुये जेटली ने कहा कि रबी मौसम की बुवाई पिछले साल के मुकाबले अधिक हुई है जबकि ऑटोमोबाइल बिक्री में मिली जुली स्थिति रही है। जेटली ने कहा, ‘बेशक नई व्यवस्था में जाने से कुछ उथल-पुथल तो होगी ही, लेकिन इसके मुकाबले दीर्घकाल में इसके काफी फायदे होंगे।’ उन्होंने कहा कि नोटबंदी से ब्याज दरों में भी कमी आ सकती है। ‘उम्मीद है कि अब किसी एक स्तर पर दरें नीचे आ सकतीं हैं। कराधान व्यवस्था में अधिक धन आयेगा और हमारा कर आधार बढ़ेगा।’ जेटली ने आगे कहा कि बैंकों में कम लागत वाली जमा पूंजी बढ़ेगी। इससे बैंक इस अचानक बढ़ी पूंजी को सामाजिक ढांचागत सुविधाओं, उद्योग एवं व्यापार जगत को अपेक्षाकृत कम दरों पर उपलब्ध करा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये इसमें कई पहलू हैं। जो धन जमा नहीं कराया गया वह रिजर्व बैंक के क्रेडिट में होगा और उसका रचनात्मक ढंग से उपयोग हो सकेगा। जो पैसा जमा भी कराया जा रहा है, उसका तुरंत जो लाभ होगा उसमें बढ़ी दर से कर लगाया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर का आधार बढ़ेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रा की छपाई पूरी तरह से जटिल मुद्दा है और इसमें समय भी काफी लगता है। बड़ी मात्रा में पहले जारी मुद्रा के स्थान पर नई मुद्रा को जारी करने के लिये रिजर्व बैंक को सोच विचार के साथ काम करना होता है अन्यथा इसमें गड़बड़ी हो सकती है।

जेटली ने इस बात को स्वीकार किया कि नोटबंदी का फैसला करते समय बैंकों के बाहर लंबी लाइनों के बारे में भी जानकारी थी। उन्होंने इसके लिये लोगों की सराहना की कि उन्होंने काफी सहयोग किया और अनुशासन के साथ लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा की। वित्त मंत्री ने कहा कि लोग पहले से ही डिजिटल लेनदेन की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और 80 करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्ड में से 45 करोड़ कार्ड सक्रिय हैं। इसके अलावा 23 करोड़ ई-वॉलेट भी हैं जो कि पिछले डेढ साल में शुरू हुये हैं।

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First Published on December 2, 2016 4:33 pm

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