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वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट से पहले इन्‍कम टैक्‍स भरने वालों पर बोझ कम करने के दिए संकेत

सरकार मौजूदा टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 4 लाख रुपए करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में टैक्स छूट की लिमिट 2,50,000 रुपए है।
केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (दाएं) सहयोगी मंत्रियों ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल (बाएं) और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ ( फाइल फोटो-PTI)

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आय कर भरने वालों को आगामी बजट में छूट के संकेत दिए हैं। फरीदाबाद में आज (सोमवार को) भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कर अदा करना नागरिकों का कर्तव्य होता है। इसे समय पर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सात दशक से देश में यह धारणा बनी हुई थी कि अगर हमने सरकार को कर अदा नहीं किया तो इसमें कुछ अनैतिक या गलत नहीं है। जेटली ने कहा कि लोगों को समय पर सही कर अदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था और ऐसा कर ढांचा बनाने जा रही है जिससे कि लोग स्वत: कर अदा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में भारत में ऐसा कर ढांचा और कानून होगा कि लोग स्वत: कर जमा कर सकेंगे।

माना जा रहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 के आम बजट में केंद्र सरकार नौकरीपेशा लोगों के लिए कुछ नयी राहत का एलान कर सकती है। पहली फरवरी को इस बार आम बजट पेश होने वाला है, इसलिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की मुलाकातों का सिलसिला भी तेज है। सूत्र बताते हैं कि सरकार आय कर की धारा 80सी के तहत आयकर छूट के लिए निवेश की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ा सकती है। जानकारों का कहना है कि इस सीमा में वृद्धि बहुत दिनों से लंबित है। लोगों की आय बढ़ी है, ऐसे में इसे अब बढ़ाना चाहिए। अगर सरकार आगामी बजट में यह निर्णय लेती है तो यह नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।

इसके अलावा सरकार मौजूदा टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 4 लाख रुपए करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में टैक्स छूट की लिमिट 2,50,000 रुपए है। सालाना ढाई लाख रुपए तक कमाने वाले व्यक्ति को इनकम टैक्स नहीं देना होता है। अगर सरकार टैक्स स्लैब में बदलाव करती है तो आगामी वित्त वर्ष से 4 लाख तक की कमाई करने को टैक्स देने से छूट मिल जाएगी। दरअसल, टैक्स स्लैब में बदलाव करने के पीछे मोदी सरकार की मंशा उन कर दाताओं को तोहफा देना है, जिन्होंने नोटबंदी का दर्द सहा है।

वर्तमान में तीन टैक्स स्लैब है। इसके तहत जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से कम है उन्हें टैक्स अदा करने से छूट मिली हुई है। इसके बाद 10, 20 और 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगाया जाता है। सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वाले से 10 पर्सेंट टैक्स वसूला जाता है। जबकि 5 लाख से 10 लाख तक सालाना इनकम वालों से 20 प्रतिशत और 10 लाख से ज्यादा की कमाई करने वाले को 30 पर्सेंट टैक्स देना होता है। अब सरकार नए टैक्स स्लैब और रेट्स पर विचार कर रही है।

पर्सनल टैक्सेज के अलावा मोदी सरकार अपने चौथे बजट में कॉरपोरेट टैक्स में भी फेरबदल पर विचार कर रही है।जेटली पहले कह चुके हैं कि मोदी सरकार कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 25 पर्सेंट पर लाना चाहती है। अब माना जा रहा है कि सरकार डायरेक्ट टैक्स में बदलाव कर इस लक्ष्य की तरफ बढ़ने की कोशिश करेगी। जानकारों के मुताबिक सरकार स्मॉल टैक्सपेयर्स को भी कई राहत दे सकती है। डिविडेंड टैक्स फ्रेमवर्क में भी बदलाव किए जा सकते हैं। सरकार इस टैक्स के लिए उन लोगों को जवाबदेह बनाना चाहती है, जिन्हें इनकम का बड़ा हिस्सा इससे हासिल हो रहा है।

 

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