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सस्ती हुर्इं सब्जियां, लेकिन किसान परेशान

नोटबंदी के बाद कितना पैसा आया या कालाबाजारी पर कितना लगाम लगा यह तो आंकड़ा और वक्त बताएगा।
Author गुरुग्राम | December 22, 2016 02:57 am
दिल्ली में सब्जी बेचता एक विक्रेता। (फाइल फोटो)

नोटबंदी के बाद कितना पैसा आया या कालाबाजारी पर कितना लगाम लगा यह तो आंकड़ा और वक्त बताएगा। लेकिन इसका फौरी असर सब्जियों और अनाजों की कीमत में गिरावट में देखने को मिला है। पिछले करीब एक माह से सब्जियों के भाव नहीं बढ़े हैं साथ ही दालों चावल और आटे के भाव में भी कमी देखने को मिली है।  जो आम लोगों के लिए राहत की खबर तो है ही लेकिन किसानों में निराशा है। किसानों का कहना है कि उन्हें उनके उत्पादन सही कीमत नहीं मिल रही। जिले के सोहना, फरुखनगर, पटौदी व शहर के साथ लगते इलाकों में सब्जी की खेती बड़ी मात्रा में होती है। यहां से साइबर सिटी में सब्जी की जरूरतों को पूरा करने के अलावा दिल्ली तक की मंडियों में सप्लाई होती है। लेकिन कीमत कम मिलने से किसान दुखी हैं।

बागवानी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सब्जी की नई फसल करीब एक माह पहले ही बाजार में आ गई है, लेकिन भाव कम मिलने के कारण किसान चिंतित हैं। सोहना के किसान राजेंद्र सिंह, प्रदीप और बलबीर सिंह का कहना है कि उनके क्षेत्र के ज्यादातर किसान गुरुग्राम की मंडी में ही सब्जियां सप्लाई करते हैं लेकिन इस बार किसानों को निराशा हाथ लग रही है। सब्जियों के उत्पादन पर काफी लागत आ रही है मगर इस बार मजबूरी में औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं। अगर यही हालात रहे तो किसान सब्जी की खेती से मुंह भी मोड़ सकते हैं। किसानों का कहना है किबिचौलिए किसानों से कम रेट पर सब्जी खरीद थोक विके्रताओं को बेचते हैं। किसानों को मिलने वाले मुनाफे का एक हिस्सा बिचौलिए के पास चला जाता है। हालांकि, बाजार कमेटी के अधिकारी किसानों को जागरुक करने में लगे हैं कि वह खुद मंडी में आकर सब्जी व अन्य उत्पाद दें।

 

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