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तो क्‍या आंकड़ों की नजर में झूठ है भारत के ब्रिटेन से बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाने का दावा?

प्रसिद्ध कारोबारी पत्रिका फोर्ब्स में छपे लेख में दावा किया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ चुकी है।
प्रसिद्ध कारोबारी पत्रिका फोर्ब्स में छपे लेख में दावा किया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ चुकी है।

एक अमेरिकी कारोबारी पत्रिका द्वारा किए गए इस दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने आकार के मामले में ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है। ये दावा अंतरराष्ट्रीय कारोबारी पत्रिका फोर्ब्स में छपे एक लेख में किया गया है लेकिन भारतीय अखबार “द हिंदू” ने दावा किया है आंकड़ों के आधार पर ऐसा कहना सही नहीं होगा।  द हिंदू ने अपने दावे के समर्थन में इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ), भारत सरकार और दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के मुद्रा से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया है।

फोर्ब्स पत्रिका कि रिपोर्ट प्रमुख आर्थिक संस्था मैकिंजी के पूर्व कंसल्टेंट और सिंगुआ यूनिवर्सिटी के मौजूदा छात्र ने लिखी है। फोर्ब्स में छपे लेख में कहा गया है कि साल 2016 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 18.7 खरब पाउंड थी। लेखकों ने साल 2016 में पाउंड के मूल्य में 20 गिरावट मानते हुए ब्रिटिश अर्थव्यस्था का आकार 22.9 खरब डॉलर माना है। फोर्ब्स के लेखकों ने 66.60 प्रति डॉलर के विनिमय मुल्य के आधार पर साल 2016 में भारत की अर्थव्यवस्था को 1530 खरब रुपये (23 खरब डॉलर) माना है।

यर्नेस्ट इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने द हिंदू को बताया कि साल 2016 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 1490 खरब रुपये होगा। हालांकि ये श्रीवास्तव का आरंभिक अनुमान है। वहीं आईएमएफ ने अक्टूबर में कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार साल 2016 में 1221.50 खरब रुपये तक हो सकता है। ये आंकड़ा फोर्ब्स पत्रिका में किए गए दावे के काफी कम है।

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार साल 2016 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 715 खरब रुपये था। अगर तीसरी और चौथी तिमाही के लिए इस आंकड़े को दोगुना कर दिया जाए तो भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 1430 खरब रुपये तक होगा। हालांकि छमाही जीडीपी को दोगुना करके सालाना जीडीपी का अनुमान लगाना उचित तरीका नहीं है लेकिन नोटबंदी के कारण चौथी तिमाही में जीडीपी में गिरावट में आशंका को देखते हुए ये अनुमान एक हद तक मददगार साबित हो सकता है।

मुद्रा विनिमय की दर से भी दो देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तुलनात्मक छवि उभरती है। फोर्ब्स की रिपोर्ट में ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड की डॉलर की तुलना में विनिमय दर 0.81 पाउंड प्रति डॉलर माना है। हालांकि बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुसार ये दर 0.80 पाउंड प्रति डॉलर है। विनिमय दर में ये अंतर देखने में काफी मामूली लग सकता है कि लेकिन जब बाद पूरे देश की अर्थव्यवस्था की हो तो ये अंतर बड़ा हो जाता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की दर से फोर्ब्स पत्रिका द्वारा ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के आकार 187 खरब पाउंड विनिमय के बाद करीब 23.30 खरब डॉलर होगी जो लेखकों द्वारा बताई गई भारतीय अर्थव्यवस्था से ज्यादा हुआ।

16 दिसंबर 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डॉलर से रुपये की विनिमय दर 67.78 रुपये प्रति डॉलर अधिसूचित की। ऐसे में फोर्ब्स के लेखकों द्वारा बताए गए भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के आंकड़ों को आरबीआई की विनिमय दर से आंके तो भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 22.60 खरब डॉलर हुआ। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से बड़े होने के दावो को आंकड़े पुष्ट नहीं करते।

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  1. M
    Masoom
    Dec 22, 2016 at 4:23 pm
    Could be happened
    (0)(0)
    Reply