December 10, 2016

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नोट बैन: लोगों को कैश मिलने में हो रही दिक्कत लेकिन, इनकी हो रही खूब कमाई

बाजार के कई सेक्टर्स की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली है। कैश की किल्लत के चलते लोग डिजिटल पेमेंट पर ही अधिकतर खरीदारी कर रहे हैं।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

देश में नोटबंदी हो जाने के बाद खरीदारी करना काफी मुश्किल हो गया है। बाजार के कई सेक्टर्स की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली है। कैश की किल्लत के चलते लोग डिजिटल पेमेंट पर ही अधिकतर खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में अधिकतर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं कुछ लोगों की कमाई भी खूब हो रही है। जानिए नोटबंदी से किनकी कमाई में हुआ है इजाफा-

दोगुना हुई कार्ड स्वाइप मशीनों की मांग:

सरकार के फैसले के बाद प्वाइंट ऑफ सेल (स्वाइप मशीन) मशीनों की मांग दोगुनी हो गई है। इन मशीनों की मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनी पाइन लैब्स के सीईओ लोकवीर कपूर ने बताया, ‘पिछले दो दिनों में हमारे पीओएस टर्मिनल्स में ट्रांजैक्शंस की संख्या डबल हो गई है। नए टर्मिनल्स के इंस्टॉलेशन के लिए हमें हजारों रिक्वेस्ट मिली हैं। ये रिक्वेस्ट डॉक्टरों, कपड़ा दुकानदारों, वेडिंग प्लानर्स की तरफ से मिली हैं।’

ट्रेडर्स और दुकानदारों को राहत:

नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कार्ड के खरीदारी करने पर बैंक पर लगाए जाने वाले 90 पैसे के चार्ज को खत्म कर दिया है। इस फैसले से सीधा फायदा दुकानदारों और ऑनलाइन रिटेलर्स को होगा, जिन्हें कार्ड कंपनियों को चार्ज देना पड़ता है। NPCI के अंतर्गत RuPay कार्ड आते हैं और इस फैसले के बाद MasterCard और Visa कार्ड जैसे विरोधियों को भी चार्ज खत्म करना पड़ सकता है। देश में कुल 69 करोड़ डेबिट कार्ड हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से जुड़ी NPCI के अंतर्गत 30 करोड़ डेबिट कार्ड आते हैं। इन 30 करोड़ में जनधन योजना के तहत दिए गए डेबिट कार्ड भी हैं। कार्ड स्वाइप और ई-कॉमर्स ट्रांसजेक्शन पर अभी तक कार्ड जारी करने वाले बैंक पर 60 पैसे और कार्ड स्वीकार करने वाले बैंक पर 30 पैसे का चार्ज लिया जाता था।

बढ़ा ई-वॉलेट का इस्तेमाल:

नोटबंदी के बाद ‘कैशलेस दिनों’ में लोगों की सबसे ज्यादा मदद ई-वॉलेट मोबाइल ऐप्स कर रही हैं। फैसले के बाद पेटीएम, जियो मनी, मोबीक्विक, एयरटेल मनी, फ्री चार्ज, वोडाफोन एमपैसा जैसी ऐप्लीकेशन का इस्तेमाल बढ़ा है। जब तक पैसों की किल्लत से छुटकारा नहीं मिलता तब तक इन्हें यूज करना लोगों की जरूरत और मजबूरी दोनों हैं।

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First Published on November 15, 2016 9:03 am

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