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एनपीए पर गुमराह कर रहे हैं जेटली, सरकार ‘साठगांठ के पूंजीवाद’ को दे रही बढ़ावा: माकपा

सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को इस घोषणा से पहले कुछ लोगों को इस बारे में पहले से पता था।
Author नई दिल्ली | November 17, 2016 18:31 pm
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी। (पीटीआई फाइल फोटो)

माकपा ने गुरुवार (17 नवंबर) को वित्त मंत्री अरुण जेटली पर संसद और पूरे देश को एसीआरए तथा गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के मुद्दे गुमराह करने का आरोप लगाया है। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि सरकार ‘साठगांठ के पूंजीवाद’ को बढ़ावा दे रही है। येचुरी ने कहा कि 500 और 1000 का नोट बंद करने के मुद्दे पर उनकी पार्टी जेपीसी के गठन के लिए एक प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को इस घोषणा से पहले कुछ लोगों को इस बारे में पहले से पता था। उन्होंने एनपीए को बहुत बड़ा घोटाला करार किया। पिछले दो साल में यह दोगुना बढ़ा है और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को सजा देने का अनुपात कम हुआ है। सरकार साठगांठ के पूंजीवाद में शामिल है।

संसद में बुधवार (16 नवंबर) को जेटली के जवाब पर येचुरी ने कहा कि वित्त मंत्री ने एनपीए पर जो कहा वह गलत था। वित्त मंत्री ने कहा कि बट्टे खाते में डालना कर्ज समाप्त नहीं करना है। यह अभी भी बैंक के खातों में रहेगा और बैंक इसे वसूल करने का प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने जेटली के एनपीए पर निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा निष्पादित आस्तियों के एनपीए बनने के बारे में रिजर्व बैंक के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं। माकपा नेता ने बुधवार को राज्यसभा में कहा था कि एसबीआई ने अपने एनपीए से 7,000 करोड़ रुपए को बट्टे खाते में डाल दिया है। सरकार पर हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि पिछले दो साल में 1,12,078 करोड़ रुपए के कर्ज को बट्टे खाते में डाला गया है और वे कह रहे हैं कि इसे अभी भी वसूला जाएगा।

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  1. दिनेश
    Nov 17, 2016 at 4:35 pm
    देश छोडने से पहले माल्या जेटली से मिला था. यह खबर देश के बड़े अखबारों में छपी थी. वही जेटली अब एन पीए (नान परफार्मिंग एसेट) की मनमानी व्याख्या दे रहे हैं . उस संसद में जहां एक से एक विद्वान आज भी हैं. लोगों को रामनाम की अफीम चटा कर अपने चहेते पूंजीपतियों का कर्ज माफ़ करने वालों, तुम्हारे इन कारनामों को लोग समझते हैं. वक्त आने पर तुम्हें इसका जवाब मिल जाएगा.
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    1. J
      jkkalla
      Nov 18, 2016 at 11:27 am
      Either Sitaram Yechuri is not aware of NPA Norms and the technical term of Write-off of Bank's Loan or he is giving statement with political mind. Bank's never loose their right to recover. At a certain point doents may become time-barred in the absence of revival which certainly not available in case of bad loan, so calling it off and writing it off save that problems. Yechury knows all this gimmicks but to fool public he is doing so. Rest ures Banks can recover thru DRT/Courts.
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      1. Narendra Batra
        Nov 18, 2016 at 8:48 am
        सुन रे दोगले देशद्रोही दल्ले वामपंथी जिस नक्सलिते को पालते है न वो देश भक्ति का काम नहीं है वो तेरे जैसे सुवर करते है और तुम वामपंथी कोठे के दल्ले हो अपनी माँ बहन बेटियो का सोडा करते हो ये तुमारी पार्टी की एक लेडिस ने खुद काबुल है की उसके और उसकी माँ के कितनो के साथ सम्भनाङह है उसे भी याद नहीं ये काम वो आते करतु है जिसे आम भाषा में कहते है और जो करवाते है वो उसके दल्ले (भड़वे) होते है ऐसा ही एक कोठा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय है जो की तुमारी ही सर्पार्टी में चलता है उसमे नए देशद्रोही
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