December 05, 2016

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एनपीए पर गुमराह कर रहे हैं जेटली, सरकार ‘साठगांठ के पूंजीवाद’ को दे रही बढ़ावा: माकपा

सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को इस घोषणा से पहले कुछ लोगों को इस बारे में पहले से पता था।

Author नई दिल्ली | November 17, 2016 18:31 pm
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी। (पीटीआई फाइल फोटो)

माकपा ने गुरुवार (17 नवंबर) को वित्त मंत्री अरुण जेटली पर संसद और पूरे देश को एसीआरए तथा गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के मुद्दे गुमराह करने का आरोप लगाया है। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि सरकार ‘साठगांठ के पूंजीवाद’ को बढ़ावा दे रही है। येचुरी ने कहा कि 500 और 1000 का नोट बंद करने के मुद्दे पर उनकी पार्टी जेपीसी के गठन के लिए एक प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को इस घोषणा से पहले कुछ लोगों को इस बारे में पहले से पता था। उन्होंने एनपीए को बहुत बड़ा घोटाला करार किया। पिछले दो साल में यह दोगुना बढ़ा है और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को सजा देने का अनुपात कम हुआ है। सरकार साठगांठ के पूंजीवाद में शामिल है।

संसद में बुधवार (16 नवंबर) को जेटली के जवाब पर येचुरी ने कहा कि वित्त मंत्री ने एनपीए पर जो कहा वह गलत था। वित्त मंत्री ने कहा कि बट्टे खाते में डालना कर्ज समाप्त नहीं करना है। यह अभी भी बैंक के खातों में रहेगा और बैंक इसे वसूल करने का प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने जेटली के एनपीए पर निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा निष्पादित आस्तियों के एनपीए बनने के बारे में रिजर्व बैंक के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं। माकपा नेता ने बुधवार को राज्यसभा में कहा था कि एसबीआई ने अपने एनपीए से 7,000 करोड़ रुपए को बट्टे खाते में डाल दिया है। सरकार पर हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि पिछले दो साल में 1,12,078 करोड़ रुपए के कर्ज को बट्टे खाते में डाला गया है और वे कह रहे हैं कि इसे अभी भी वसूला जाएगा।

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First Published on November 17, 2016 6:31 pm

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