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वाणिज्य मंत्रालय ने सेज पर मैट का मुद्दा फिर वित्त विभाग के साथ उठाया

एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार (4 अगस्त) को कहा कि निर्यात को प्रोत्साहन तथा सेज में रोजगार सृजन के लिए यह मांग की गई है।
Author नई दिल्ली | August 4, 2016 18:12 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

वाणिज्य मंत्रालय ने एक बार फिर से वित्त मंत्रालय से विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को वापस लेने या उसे कम करने की मांग की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार (4 अगस्त) को कहा कि निर्यात को प्रोत्साहन तथा सेज में रोजगार सृजन के लिए यह मांग की गई है। वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव आलोक वर्धन चतुर्वेदी ने कहा कि मंत्रालय ने कई मुद्दे मसलन सेज इकाइयों को घरेलू दर क्षेत्र (डीटीए) में जॉब वर्क्स की अनुमति और सेज से डीटीए को निर्यात की अनुमति उस शुल्क दर पर जो भारत के साथ मुक्त व्यापार करार करने वाले भागीदारों को दी गई है।

चतुर्वेदी ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘मैट और डीडीटी को हटाने का सवाल है, मैं समझता हूं कि जिस समय सेज कानून लागू किया गया था उस वक्त कुल सीधी कर मुक्त व्यवस्था की पेशकश की गई थी, लेकिन सरकार ने अचानक मैट लगा दिया। यह सेज इकाइयों के साथ उचित नहीं है और साथ ही यह सरकार की स्थिर कर व्यवस्था देने के सिद्धान्त के अनुरूप भी नहीं है। हमने इन मुद्दों को वित्त मंत्रालय के साथ उठाया है। उन्होंने और ब्योरा देते हुए कहा कि मैट एक अग्रिम कर है और इसे समायोजित किया जा सकता है, लेकिन इसकी दर काफी ऊंची है और इसके समायोजन के लिए जो अवधि उपलब्ध कराई गई है वह ऐसी है कि सेज को अंत में आयकर देना होगा, क्योंकि समूचे मैट क्रेडिट को 10 साल की सीमित अवधि में समायोजित नहीं किया जा सकता।

चतुर्वेदी ने कहा कि वित्त मंत्रालय यह दलील दे रहा है कि मैट को विभिन्न मुनाफा आधारित छूट की वजह से होने वाले राजस्व नुकसान की आंशिक भरपाई को लागू किया गया है और इससे कारपोरेट कर की औसत दर भी नीचे आ रही है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य विभाग ने यह मांग प्रतिकूल निर्यात परिस्थितियों तथा निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन में सेज की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए की है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के साथ वैकल्पिक सुझाव पर भी विचार किया गया है। यह मैट को 20.5 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया जाए। या फिर मैट क्रेडिट की समूची अवधि का विस्तार किया जाए जिससे सेज की कर देनदारी का समायोजन किया जा सके। यह मुद्दा बार बार राजस्व विभाग के साथ उठाया गया है। पिछले बजट पूर्व विचार विमर्श में भी वाणिज्य विभाग ने वित्त मंत्रालय से इस मामले को फिर से देखने को कहा था, लेकिन उस समय कोई राहत नहीं मिल पाई थी।

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