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कोयला घोटाला में एक कंपनी और अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप तय

अदालत ने सीबीआई के आरोप पत्र का संज्ञान लेने के बाद कंपनी और छह लोगों को आरोपी के रूप में समन भेजा था।
Author नई दिल्ली | February 13, 2017 21:53 pm
कोयला खदान में काम करता मज़दूर। (फाइल फोटो)

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने तथ्यों को कथित रूप से गलत ढंग से पेश कर झारखंड में एक कोयला खदान का आवंटन प्राप्त करने के लिए रांची आधारित एक कंपनी, उसके तीन निदेशकों और दो अन्य के खिलाफ सोमवार (13 फरवरी) को आरोप तय किये। आरोपियों ने जुर्म नहीं कबूला और मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था जिसके बाद विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने उन पर मुकदमा चलाया। अदालत ने एम:एस डोमको प्राइवेट लिमिटेड, उसके तीन निदेशकों बिनय प्रकाश, वसंत दिवाकर मांजरेकर और परमानंद मोंडल, चार्टर्ड अकाउंटेंट मनोज कुमार गुप्ता और संजय खंडेलवाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के लिए आरोप तय किये। इससे पहले आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश देते हुये अदालत ने कहा था कि ऐसा करने के लिए ‘प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य’ हैं।

अदालत ने सीबीआई के आरोप पत्र का संज्ञान लेने के बाद कंपनी और छह लोगों को आरोपी के रूप में समन भेजा था। हालांकि अदालत ने बाद में एक अन्य आरोपी शुकदेव प्रसाद को यह कहते हुये बरी कर दिया था कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में दावा किया कि डोमको प्राइवेट लिमिटेड ने ओडिशा में एक पिग आयरन संयंत्र लगाने के लिए एक कोयला खदान के आवंटन के लिए इस्पात मंत्रालय में आवेदन दिया था। कपंनी ने वर्ष 2000 में कोयला मंत्रालय में भी कोयला खदान के आवंटन के लिए आवेदन किया था। कंपनी द्वारा दी गयी सूचना और दस्तावेजों के आधार पर उसे पश्चिम बोकारो में लालगढ़ (उत्तर) कोयला खदान आवंटित की गयी। सीबीआई ने आरोप लगाया कि जांच में यह पता चला कि कंपनी ने इस्पात और कोयला मंत्रालय के समक्ष कई बार तथ्यों को गलत ढंग से पेश किया।

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