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बिड़ला को कोई फायदा नहीं पहुंचाया: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को बताया है कि हिंडाल्को को तालाबीरा 2 कोल ब्लॉक के आबंटन में न तो उन्होंने किसी को ‘प्रभावित’ करने का प्रयास किया और न ही इसमें ‘बेवजह कोई जल्दबाजी’ की गई।
Author नई दिल्ली | October 3, 2015 09:56 am
मनमोहन ने कहा, कोल ब्लॉक आबंटित करने के लिए बिड़ला से कोई वादा नहीं किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को बताया है कि हिंडाल्को को तालाबीरा 2 कोल ब्लॉक के आबंटन में न तो उन्होंने किसी को ‘प्रभावित’ करने का प्रयास किया और न ही इसमें ‘बेवजह कोई जल्दबाजी’ की गई। मनमोहन सिंह ने मामले की जांच कर रही सीबीआइ को यह भी बताया कि उन्होंने ओड़ीशा में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आबंंटित करने के लिए बिड़ला से ना तो कोई वादा किया था और ना ही कोई आश्वासन दिया था।

वर्ष 2005 में कोयला मंत्रालय का भी पदभार देखने वाले सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में बिड़ला और ओड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की चिट्ठियों की सावधानी से पड़ताल के लिए केवल मंत्रालय को भेज दिया था। उन्होंने कहा- पूछे जाने पर, मैं कहता हूं कि मुझे याद नहीं पड़ता कि मेरे पीएस की नोटिंग के अलावा मैंने किसी को स्मरणपत्र जारी करने के लिए कहा हो।

यह एक सामान्य प्रशासनिक मामला है। प्रधानमंत्री कार्यालय इस तरह के मुद्दों में नहीं जाता। खैर, मैंने पहले ही कहा था कि मैंने किसी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की और फैसला लेने में कोई अनावश्यक जल्दबाजी नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल को इस मामले में सिंह और अन्य को बतौर आरोपी तलब किए जाने के निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी थी जिनमें बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी परख भी शामिल हैं।

हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आबंटन में कथित घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के समक्ष दर्ज कराए गए अपने बयान में सिंह ने कहा कि उन्हें सात मई 2005 को बिड़ला की चिट्ठी मिली थी। इसमें उन्होंने सरकार से तालावीरा 2 ब्लॉक को उनकी कंपनी को आबंटित करने की अपील की थी ताकि इससे उन्हें ओड़ीशा में एक बड़ा एल्यूमिनियम संयंत्र लगाने में मदद मिल सके। मुझे फैसले का पता था कि मैं पहले ही सचिव (कोयला) को अपने स्तर पर 25वीं स्क्रीनिंग कमेटी बैठक की कार्रवाई को मंजूरी देने की इजाजत दे चुका हूं। इसलिए बिड़ला के पत्र को केवल कोयला मंत्रालय को रिपोर्ट के लिए भेज दिया गया।

सिंह ने बयान में कहा कि बिड़ला की अपील फैसले को बदलने के लिए थी और मामला यह था कि मामले को फिर से खोला जाए या नहीं। 25वीं स्क्रीनिंग कमेटी के अनुसार, हिंडाल्को समेत कई कंपनियों को सकारात्मक नहीं पाया गया और यह फैसला किया गया कि तालावीरा 2 कोल ब्लॉक को नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएलसी) को आबंटित किया जाए। सिंह ने सीबीआइ को यह भी बताया कि बिड़ला ने अपनी अपील के समर्थन में दो पत्र लिखे जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से कोयला मंत्रालय को रिपोर्ट के लिए कहने को कहा था।

पूर्व प्रधानमंत्री कहा कि इस प्रकार यह स्पष्ट है कि बतौर कोयला मंत्री और प्रधानमंत्री, मैंने केवल कुमार मंगलम बिड़ला के पत्रों को पड़ताल के लिए कोयला मंत्रालय को भेजा था। उन्होंने एक कोल ब्लॉक के आबंटन की अपील की थी। इतना तक सही था कि मामले में उनके पक्ष का का सावधानी से अध्ययन किया जाए। इससे ज्यादा कुछ नहीं किया।

मैं फिर दोहराता हूं कि मैंने किसी भी स्तर पर बिड़ला के आवेदन पर कार्रवाई करते हुए आकलन और कोयला मंत्रालय की रिपोर्ट को प्रभावित नहीं किया।

सिंह ने कहा कि इस बात को समझा जाना चाहिए कि बिड़ला और ओड़ीशा के मुख्यमंत्री के पत्रों में स्क्रीनिंग कमेटी के फैसले की समीक्षा की अपील की गई थी। कोयला मंत्रालय को रिपोर्ट देनी थी। पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री होने के नाते उनके पास ‘चिंता करने के लिए बहुत से अन्य मुद्दे’ थे और कोल ब्लॉक आबंटन पर हर दिशानिर्देश को जानना और याद रखना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

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  1. N
    Naveen Bhargava
    Oct 3, 2015 at 1:14 pm
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    Reply
    सबरंग