December 08, 2016

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सीआइसी ने अडाणी घराने को स्टेट बैंक से दिए गए कर्ज का ब्योरा देने से किया इनकार

आरटीआइ कानून के तहत वैसी सूचना, जिसे खुलासे से छूट प्राप्त है, उसका खुलासा किया जा सकता है बशर्ते बड़े पैमाने पर जनहित जुड़ा हो।

Author नई दिल्ली | November 28, 2016 03:31 am
अडाणी समूह के चेयरमैन और अरबपति कारोबारी गौतम अडानी। (फाइल फोटो)

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने औद्योगिक घराने अडाणी समूह को स्टेट बैंक आॅफ इंडिया द्वारा दिए गए कर्ज के ब्योरे का खुलासा करने से मना कर दिया है। सीआइसी के अनुसार, स्टेट बैंक ने कर्ज को न्यासीय क्षमता (फिडुशियरी कैपेसिटी) के तौर पर दे रखा है और इसमें वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा है। केंद्रीय सूचना आयोग ने रमेश रणछोड़दास जोशी नामक एक व्यक्ति की याचिका पर यह फैसला दिया। उन्होंने स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी थी कि गौतम अडाणी की कंपनियों को किन प्रावधानों के तहत आॅस्ट्रेलिया में कोयले की खदानें खरीदने के लिए कर्ज दिया गया। याचिकाकर्ता ने कर्ज की मंजूरी के दस्तावेज भी मांगे थे।

अडाणी घराने को बड़ी मात्रा में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने कर्ज दिया था। सूचना आयुक्त मंजुला पराशर ने अपने आदेश में कहा कि मांगी गई सूचना वाणिज्यिक है और इससे तीसरे पक्ष का भरोसा जुड़ा हुआ है। इसीलिए आरटीआइ कानून की धारा आठ (1)(डी) यानी, वाणिज्यिक विश्वास और (ई) यानी न्यासीय क्षमता (अमानत के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान) के तहत इस बारे में खुलासा नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने दावा किया कि जोशी ने अडाणी समूह के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने अपने आवेदन में इस बात का जिक्र नहीं किया है कि यह मामला बड़े जनहित का है। उन्होंने निजी तौर पर जानकारी चाही है। गौरतलब है कि आरटीआइ कानून के तहत वैसी सूचना, जिसे खुलासे से छूट प्राप्त है, उसका खुलासा किया जा सकता है बशर्ते बड़े पैमाने पर जनहित जुड़ा हो। स्टेट बैंक के सीपीआइओ की इस दलील को सही मानते हुए मंजुला पराशर ने अपने आदेश में कहा, ‘तीसरी पार्टी के कर्ज एकाउंट के बारे में तब तक नहीं बताया जा सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि इससे जनहित का बड़ा मुद्दा जुड़ा है।’ बाकी पेज 8 पर

गौरतलब है कि मीडिया में खबरें आई थीं कि स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने अडाणी समूह की कंपनी अडाणी माइनिंग को क्वींसलैंड में खदानें खरीदने के लिए एक बिलियन डॉलर (लगभग छह हजार करोड़ रुपए) का कर्ज दिया था। अडाणी समूह वहां सात बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। इस बाबत करार पर दस्तखत के लिए स्टेट बैंक ने पश्चिम क्वींसलैंड के क्लेरमोंट के पास कार्मीकेल में खदान परियोजना का असेस्मेंट किया था। इस कर्ज को मिलाकर अडाणी घराना अब तक स्टेट बैंक से कुल 65 हजार करोड़ रुपए ले चुका है। स्टेट बैंक के कर्ज की घोषणा होने पर स्टेट बैंक और अडाणी एंटरप्राइजेज- दोनों ही के शेयरों में बीएसई में बड़ी उछाल देखी गई। इस परियोजना के बाबत गौतम अडाणी ने अपने एक बयान में कहा कि भारतीय बाजार में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से आॅस्ट्रेलियाई खदान का सौदा बेहद महत्त्वपूर्ण है। अडाणी समूह की ओर से कर्ज मिलने की घोषणा तब की गई थी, जब गौतम अडाणी जी20 सम्मेलन में एक कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर गए थे।

 

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First Published on November 28, 2016 3:31 am

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