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चीन की आर्थिक सुस्ती से भारत में उपजा दर्दः रघुराम राजन

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि चीन की आर्थिक सुस्ती से उपजा दर्द भारत का भी दर्द है।
Author मुंबई | November 22, 2015 01:13 am
रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन (फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि चीन की आर्थिक सुस्ती से उपजा दर्द भारत का भी दर्द है। उनका यह कथन सरकार के दावे के बिल्कुल उलट है। सरकार कहती रही है कि चीन की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती का असर भारत पर नहीं पड़ेगा। राजन ने यहां साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट से बातचीत में कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात है। चीन को होने वाले हमारे निर्यात में कुछ की मांग कम हुई है। कई देश हैं जो चीन को उतना निर्यात नहीं कर पा रहे हैं जितना वह करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत उपभोक्ता जिंस का आयातक देश है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंस के दाम घटने से उसे मदद मिली है। इसलिए इस समय जितना असर हो सकता था, वह नहीं है। फिर भी चीन की आर्थिक सुस्ती से हम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। क्योंकि चीन की सुस्ती का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर पड़ा है और भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले महीने कोलंबिया विश्वविद्यालय में छात्रों से कहा था कि भारत पर मंदी का कोई असर नहीं पड़ा है। भारत चीन की आपूर्ति शृंखला का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन की सुस्ती को देखते हुए भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त सहारा बन सकता है। भारत की तरफ से हाल में चीन की अर्थव्यवस्था पर की गई कुछ टिप्पणियों की चीनी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया हुई। भारत में कहा गया कि चीन का आर्थिक दर्द भारत के लिए अवसर है।

राजन शुक्रवार को हांगकांग में थे जहां उन्हें हांगकांग विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। अपने साक्षात्कार में राजन ने भारत और चीन के बीच बढ़ती आपसी निर्भरता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पड़ोसियों से संबंध सुधारने के लिए स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया है। पश्चिम पर ध्यान देने के बजाय अब पूर्व की ओर ज्यादा ध्यान है। चाहे एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक हो या फिर चीन की रेशम मार्ग पहल, हमारी चीन और चीनी परियोजनाओं के साथ अधिक संलिप्तता होगी। क्षेत्र में जुड़ने और विस्तार करने में चीन का भी हित होगा।

राजन ने उम्मीद जताई कि भारत आर्थिक मार्ग के बारे में चीन से सबक लेगा। हमें चीन की विनिर्माण क्षेत्र की सफलता से सीखना चाहिए। चीन ने किस तरह अपना ढांचागत विकास किया, किस तरह ग्रामीण क्षेत्र में उद्यम को प्रोत्साहन दिया और किस तरह इतनी बड़ी मात्रा में एफडीआइ को व्यवस्थित किया।
कई भारतीय व्यवसायी जो चीन जाते रहते हैं, वे बेहतर अनुभव के साथ लौटते हैं और बताते हैं कि किस तरह चीन में भारत से बेहतर काम होता है। लेकिन हमें आंख बंद कर चीन के रास्ते पर नहीं चलना चाहिए। कुछ मामलों में दोनों के लिए गुंजाइश है लेकिन कुछ में यह नहीं हो सकती है। राजन ने इन दावों को खारिज किया कि चीन की मुद्रा युआन का अवमूल्यन कर बेजिंग ने मुद्रा के क्षेत्र में युद्ध छेड़ दिया है। उन्होंने युआन की विश्व बाजार में बड़ी भूमिका पर भी जोर दिया।

 

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