January 18, 2017

ताज़ा खबर

 

ड्रैगन के बहिष्कार की मुहिम का असर, बाजार से गायब चीनी पटाखे

भारत और पाकिस्तान के बीच मची ‘रार’ में पाकिस्तान का साथ देने के कारण सोशल मीडिया पर ‘ड्रैगन के बहिष्कार’ की मुहिम चल रही है।

भारत और पाकिस्तान के बीच मची ‘रार’ में पाकिस्तान का साथ देने के कारण सोशल मीडिया पर ‘ड्रैगन के बहिष्कार’ की मुहिम चल रही है। यह मुहिम लोगों की दीपावली भी फीकी कर सकती है क्योंकि दिल्ली के बाजारों से चीनी पटाखे गायब हो गए हैं। दो साल पहले तक देशभर के पटाखा बाजारों पर चीनी पटाखों का कब्जा था, जिसकी वजह से देश में सबसे ज्यादा पटाखों का उत्पादन करने वाले तमिलनाडु के शहर शिवकाशी का धंधा चौपट हो रहा था।
चीनी पटाखों और शिवकाशी के देसी पटाखों के दामों में दोगुना फर्क होता है और खरीदार कम दामों के कारण चीनी पटाखे ही खरीदते हैं। चीनी पटाखों का विरोध सबसे पहले 2004 में हुआ था, जब दीपावली के बाद दिल्लीवासियों में दमा और सांस लेने में तकलीफ की समस्या बढ़ने लगी। जांच में सामने आया कि चीन के पटाखों से हवा में टॉक्सिन (जहरीले तत्व) की मात्रा बढ़नी शुरू हो गई है। जांच में यह भी सामने आया कि चीन के पटाखों के दाम कम होने की एक बड़ी वजह उसमें सस्ते रसायन पोटैशियम क्लोरेट और पेराक्लोरेट का इस्तेमाल है। ये दोनों रसायन भारत में प्रतिबंधित हैं। वहीं देसी पटाखों में ज्यादातर पोटैशियम नाइट्रेट और एल्युमिनियम पाउडर का इस्तेमाल होता है।


चीन के पटाखों से लगातार प्रदूषित हो रही हवा और वातावरण को केंद्र सरकार ने एक्सप्लोसिव रूल्स, 2008 और पर्यावरण (प्रोटेक्शन) रूल्स 1986 का उल्लंघन माना और भारत में इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय बाजार में चीनी पटाखों पर रोक लगने के बाद उनकी तस्करी होने लगी। केंद्र सरकार ने अपने राजस्व गुप्तचर निदेशालय को चीनी पटाखों की तस्करी पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया। इसका नतीजा दीपावली से पहले सितंबर में निकला, जब राजस्व निदेशालय ने करीब 9 करोड़ रुपए के चीनी पटाखे जब्त किए। वैसे आंकड़े बताते हैं कि हर साल देश में करीब 2000 करोड़ रुपए के चीनी पटाखों की तस्करी होती है, लेकिन इस साल सरकारी सख्ती और चीन के विरोध के कारण दिल्ली के बाजारों से चीनी पटाखे गायब हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में चीन के भारत विरोधी रवैये के बाद वहां से आयातित सामान नहीं खरीदने की अपील की जा रही है। दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि दिवाली के सामान का चीन से आयात तीन-चार महीने पहले ही हो जाता है। चीन के बहिष्कार का अभियान कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ है, और उनके पास माल कई महीने पहले आ चुका है।

ट्रांसपोर्टरों की एक संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि वे लोग पूरी तरह से चीन के सामान का बहिष्कार करेंगे और अपने ट्रकों में चीन के माल को ढोएंगे भी नहीं। वहीं कुछ व्यापारियों का कहना है कि अगर लोगों ने चीन के सामान का पूरी तरह बहिष्कार किया, तो उनके लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। व्यापारियों के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन आॅफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि चीनी सामान के बहिष्कार का असली असर नए साल और क्रिसमस पर दिखाई देगा। अभी तो ज्यादातर व्यापारियों के पास चीन का माल आ चुका है। अगर दिवाली पर यह सामान नहीं बिकता है, तो आयातक नए साल और क्रिसमस के लिए चीन को आॅर्डर देने से बचेंगे।
खंडेलवाल का कहना है कि इस तरह का अभियान चीन के साथ-साथ भारत को अपने उत्पादों का बाजार समझने वाले उन देशों के लिए भी एक सबक है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ खड़े होते हैं। दिल्ली व्यापार संघ के अध्यक्ष देवराज बावेजा मानते हैं कि अगर चीन के सामान की खरीद 10-15 फीसद भी घटती है तो व्यापारियों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। उधर स्वदेशी जागरण मंच, दिल्ली के संयोजक सुशील पांचाल ने कहा कि चीनी सामान के बहिष्कार के उनके आंदोलन का असर अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का साथ देने के चीन के कदम से देश के लोगों में खासी नाराजगी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 17, 2016 12:43 am

सबरंग