ताज़ा खबर
 

केन्द्र ने शीर्ष कोर्ट से कहा: गैस कीमतों के नए दिशानिर्देश जारी किए

नई दिल्ली। राजग सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस मूल्य निर्धारण के लिये बनाई गई नीति के स्थान पर उसने नये दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसमें कृष्णा-गोदावरी बेसिन भी शामिल है जो केन्द्र और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच विवाद का मुद्दा है। न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर […]
Author November 14, 2014 21:28 pm
हमारी दिलचस्पी विदेशी बैंकों में गैरकानूनी तरीके से खाता रखने वालों के नामों के खुलासे की बजाए विदेश से काला धन देश में वापस लाने में है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। राजग सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस मूल्य निर्धारण के लिये बनाई गई नीति के स्थान पर उसने नये दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसमें कृष्णा-गोदावरी बेसिन भी शामिल है जो केन्द्र और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच विवाद का मुद्दा है।

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने सूचित किया, ‘‘सरकार ने नये दिशानिर्देश जारी किये हैं। वह सी रंगराजन समिति की सिफारिश के अनुरूप गैस की कीमत के फॉर्मूले पर नहीं चल रही है और नये दिशा निर्देश पहले जारी दिशानिर्देशों का स्थान लेंगे।’’

केन्द्र ने न्यायालय द्वारा 18 सितंबर को उठाये गये सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कृष्णा-गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस का मूल्य निर्धारित करने के मामले में अपना रुख स्पष्ट करने के लिये कहा था। न्यायालय जानना चाहता था कि क्या वह पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की नीति पर चलेगी या फिर इससे इतर कुछ नया कर रही है।

सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि सरकार ने 18 अक्तूबर को नई घरेलू प्राकृतिक गैस की नीति को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत एक नवंबर से प्राकृतिक गैस का मूल्य बढ़ाकर 5.61 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि रंगराजन समिति की सिफारिश को अमल में नहीं लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह अपनी दलीलें पेश करेंगे कि क्यों पहले की सिफारिशों की तुलना में नये दिशानिर्देश बेहतर हैं।

न्यायालय प्राकृतिक गैस की कीमत 4.2 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 8.4 अमेरिकी डॉलर करने के संप्रग सरकार के फैसले के खिलाफ कम्युनिस्ट सांसद गुरुदास दासगुप्ता और स्वंयसेवी संगठन कामन काज की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में केजी बेसिन से तेल और गैस के दोहन के लिये रिलायंस इंडस्ट्रीज का करार रद्द करने का अनुरोध किया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग