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मारुति से जुड़ी इन 5 खास बातों से आप शायद ही वाकिफ हों

एक मारुति कार को बनाने में कर्मचारी लगभग 2,545 स्टेप पूरे करते हैं। वहीं प्लांट की पेंट और बेल्डिंग शॉप पूरी तरह से ऑटोमैटिक होती है।
मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट का एक कर्मचारी। (Source: Express Archives)

मारुति सुजुकी देशभर में न सिर्फ अपनी सस्ती, लो मेन्टेनेंस और टिकाऊ गाड़यां बनाने के लिए मशहूर है बल्कि कि देश के टॉप कार मैन्युफैक्चरर्स में से एक है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में लगभग हर दूसरी बिकने वाली कार मारुति की होती है। मगर मारुति से जुड़ी कई ऐसी खास बाते हैं जिनसे आप पहले शायद ही वाकिफ हों। बिजनेस स्टैडर्ड की एक खबर के मुताबिक ये बातें मारुति मैन्युफैक्चरिंग यूनिट् को अपने आप में खास बनाती है।

-मारुति के कर्मचारी हर एक कार को पूरा करने के लिए 2,545 स्टेप्स फॉलो करते हैं। वहीं तीन साल पहले (2014) यह नंबर 3,077 स्टेप्स का था।

-मारुति के हरियाणा के मानेसर और गुरुग्राम स्थित दोनों मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में रोज 5 हजार गाड़ियां पेंट करने के लिए 70 हजार लीटर तेल की खपत होती है।

-कारें बनाने के लिए मारुति को हर महीने लगभग 20 हजार टन स्टील की जरूरत होती है जो जापान और कोरिया द्वारा इम्पोर्ट किया जाता है।

-दोनों प्लांटों में 2 हजार चार सौ ऑटोमैटिक रोबॉट्स काम करते हैं। प्लांटों की वेल्डिंग और पेंट शॉप लगभग पूरी तरह से इन ऑटोमैटिक रॉबोट्स के जरिए काम करती है।

-दोनों प्लांटों में रोज 4 हजार ट्रक अंदर-बाहर होते हैं। गाड़ियां बनाने के लिए जिन अलग-अलग पुर्जों की जरूरत होती है ये ट्रक उन्ही से भरे होते हैं। खबर के मुताबिक कंपनी ढाई हजार विक्रेताओं से अपना सामान मंगाती है और लगभग 650 ट्रकों में कार लोड होकर प्लांटों से बाहर डीलरों के पास पहुंचने के लिए निकलती हैं।

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