March 23, 2017

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जीएसटी लागू करने में एक कदम और आगे बढ़ी सरकार, 4 पूरक विधेयकों को मंत्रिमंडल की मंजूरी

जीएसटी के लागू होने पर केंद्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाला मूल्य वर्धित कर (वैट) सहित कई अन्य कर इसमें समाहित हो जाएंगे।

Author नई दिल्ली | March 21, 2017 05:13 am
जीएसटी व्यवस्था लागू होने से देश की आर्थिक वृद्धि दर दो फीसद तक बढ़ सकती है। (Photo-financialexpres)

देश में अप्रत्यक्ष कर की नई प्रणाली वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को इससे जुड़े चार विधेयकों के प्रारूप को मंजूरी दे दी। जीएसटी व्यवस्था लागू होने से देश की आर्थिक वृद्धि दर दो फीसद तक बढ़ सकती है। जीएसटी लागू होने के बाद पांच साल तक राज्यों में संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के प्रावधान वाले विधेयक सहित राज्यों के भीतर और बाहर वस्तुओं व सेवाओं की आपूर्ति पर शुल्क लगाने और उसकी वसूली का अधिकार देने वाले चार विधेयकों को इसी सप्ताह संसद में पेश कर दिया जाएगा। विधेयकों पर संसद की मुहर और अलग से तैयार राज्य जीएसटी विधेयक को राज्यों की विधानसभाओं में मंजूरी मिलने के बाद पूरे देश में जीएसटी व्यवस्था को लागू करने की विधायी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि जीएसटी के लागू होने पर केंद्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाला मूल्य वर्धित कर (वैट) सहित कई अन्य कर इसमें समाहित हो जाएंगे।

लग्जरी कारों, बोतल बंद वातित पेयों और तंबाकू उत्पाद जैसी अहितकर वस्तुओं पर इसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जाएगा। किस वस्तु अथवा सेवा पर किस दर से जीएसटी लगेगा, यह बाकी पेज 8 पर काम अगले महीने शुरू हो जाएगा। यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जीएसटी से जुड़े चार विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी विधेयक 2017 (सी-जीएसटी बिल), एकीकृत जीएसटी विधेयक 2017 (आइ-जीएसटी बिल), केंद्र शासित प्रदेश वस्तु व सेवाकर विधेयक 2017 (यूटी-जीएसटी बिल)और वस्तु व सेवाकर(राज्यों को मुआवजा) विधेयक 2017 (मुआवजा विधेयक)को मंजूरी दे दी गई। सूत्रों ने बताया- इन बाकी पेज 8 पर विधेयकों को धन विधेयक के तौर पर इसी हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा इन सभी विधेयकों पर एक साथ चर्चा हो सकती है। मंत्रिमंडल की सोमवार की बैठक में जीएसटी ही एकमात्र एजंडा था। सरकारी वक्तव्य में कहा गया है- सरकार देश में जीएसटी व्यवस्था जल्द से जल्द लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। जीएसटी परिषद ने एक जुलाई से जीएसटी लागू करने का फैसला किया है। जीएसटी को हाल के वर्षों में सबसे बड़े कर सुधारों के तौर पर देखा जा रहा है।

बयान में कहा गया है कि जीएसटी लागू होने से भारतीय उत्पाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।जीएसटी परिषद ने इस महीने हुई अपनी पिछली दो बैठकों में पूरक विधेयकों पर अपनी सहमति जताई थी। बयान में कहा गया है- केंद्रीय जीएसटी से केंद्र सरकार को राज्यों के भीतर वस्तुओं व सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी लगाने और वसूलने अथवा दोनों का अधिकार मिलेगा, वहीं एकीकृत जीएसटी में अंतर-राज्यीय स्तर पर वस्तुओं व सेवाओं पर कर लगाने और वसूली करने अथवा दोनों का अधिकार केंद्र को मिलने का प्रावधान होगा। इसी प्रकार केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी विधेयक, जहां विधानसभाएं नहीं हैं, में वस्तुओं व सेवाओं की आपूर्ति पर कर लगाने का अधिकार केंद्र को दिया जाएगा। मुआवजा विधेयक में राज्यों को संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। यह जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को राजस्व का नुकसान होने की स्थिति में उन्हें मुआवजा देने के बारे में है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के बजट में कहा है कि व्यापार व उद्योग को जीएसटी के प्रावधानों को समझाने के लिये देशव्यापी अभियान चलाए जाएंगे। खैतान एंड कंपनी के भागीदारी अभिषेक रस्तोगी ने टिप्पणी करते हुए कहा- जीएसटी योजना समय के अनुरूप आगे बढ़ रही है और अब एक जुलाई से इसके लागू होने की उम्मीद वास्तविक लगती है।

 

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First Published on March 21, 2017 5:13 am

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