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अब तक तो खींच ले गया उधार

मोहल्ले की परचून की दुकानों से उधार पर चल रहे लोग खौफजदा हैं कि आगे संकट गहराएगा तो क्या करेंगे?
Author नई दिल्ली | November 14, 2016 03:30 am
2000 रुपए का नया नोट। (File Photo)

मंगलवार की शाम प्रधानमंत्री के 86 फीसद मुद्रा को चलन से बाहर कर देने के एलान के बाद से पूरे देश में जो अफरातफरी का माहौल रहा वह रविवार शाम तक और गहरा गया। वित्त मंत्री के पिछले बयानों और प्रधानमंत्री के रविवार को 30 दिसंबर तक की मोहलत मांगने के बाद यह सबको अहसास है कि अभी लंबे समय तक संकट बरकरार रहने वाला है। मोहल्ले की परचून की दुकानों से उधार पर चल रहे लोग खौफजदा हैं कि आगे संकट गहराएगा तो क्या करेंगे? रविवार देर शाम तक भी एटीएम के बाहर लोग लंबी कतारों में लगे हुए थे। बहुत से लोगों को इस बात की चिंता थी कि सोमवार को बहुत से बैंक बंद रहेंगे। आठ-आठ घंटे तक लाइनों में लगे रहने के बावजूद रविवार को बहुत से लोग एटीएम से अपनी जरूरत भर का पैसा निकाल पाने में नाकाम रहे।

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सुरोजीत मजूमदार कहते हैं कि बाजार से अचानक मुद्रा के बड़े हिस्से का गायब होना संकट पैदा करता है। एक खरीदार दूसरे खरीदार को आगे बढ़ाता है और बाजार चलता है। लेकिन आपने पूरे बाजार को ठप कर दिया है। इससे कालेधन पर कितना असर पड़ेगा वह तो सरकार ही बताए लेकिन जब खुदरा विक्रेता के पास उसके बेचे माल की कीमत नहीं पहुंचेगी तो वह आगे थोक विक्रेता से कहां से सामान लेंगे। और अब वित्त मंत्री साफ तौर पर कह रहे हैं कि बैंकिंग व्यवस्था को ठीक होने में 20 से 21 दिन का समय लगेगा। तब तक हम हालात की भयावहता की कल्पना कर सकते हैं। और यह तय है कि हालात सुधरने में महीने भर तक का वक्त लग सकता है।

मजूमदार ने कहा कि सरकार एक-दूसरे से मदद करने को कह रही है और हमारे समाज का सामाजिक ताना-बाना ऐसा है कि पांच दिनों तक लोगों ने उधार मांग कर और अपनी जरूरतों में जरूरत से ज्यादा कटौती कर काम चला लिया। आप परचून की दुकान से तो उधार ले सकते हैं लेकिन अगर आपको कहीं जाना है तो आॅटो वाला आपको नहीं जानता, रिक्शा वाला आपको नहीं जानता और आप क्या करेंगे? सरकार ने शून्य तैयारी के साथ पूरे देश को आर्थिक आपातकाल में झोंक दिया है। दिलशाद गार्डेन में सब्जी की दुकान चलाने वाले मोहनलाल ने बताया कि मैंने सोचा भी नहीं था कि रविवार तक भी पैसा बाजार में नहीं पहुंच पाएगा। गाजीपुर सब्जी मंडी से लाई सब्जियां मैंने कालोनी के लोगों को उधार पर दे दीं। और अगर न देता तो उन्हें सड़ना ही था। लेकिन लोग रविवार तक भी बैंकों से अपने पैसे निकालने में कामयाब नहीं हो पाए।

अब मैं सुबह थोक मंडी नहीं जा पाऊंगा। विवेक विहार में किराना की दुकान चलाने वाले विवेक शर्मा ने बताया कि मंगलवार शाम मुझे लगा था कि एक-दो दिन का संकट होगा और मैंने कालोनी के लोगों को उधार सामान दिया। पर अब मैं थोक बाजार कैसे जाऊं। विवेक ने कहा कि अगर अगले दो दिनों में लोग मेरे उधार वापस भी करते हैं जिसकी उम्मीद कम है तो भी हालात सुधरने में देर लगेगी। पूरे बाजार में जब तक सभी तरह के नोट भरपूर मात्रा में नहीं आएंगे तब तक मंदी ही रहेगी क्योंकि सिर्फ 2000 के नोटों से खरीदारी नहीं हो सकती। अगर लोग सौ रुपए की सब्जी के लिए 2000 रुपए का नया नोट भी देंगे तो भी सब्जियां नहीं बेच पाएंगे। विवेक ने कहा कि आज से मैं उधार देने की हालत में भी नहीं हूं। हमारी टूटी कमर कब सीधी होगी इसका पता नहीं।

गाजियाबाद में एक हाउसिंग सोसाइटी के बाहर कपड़े इस्त्री करनेवाली रेखा ने बताया कि दो दिनों तक तो लोगों ने कपड़े प्रेस करवाने के बाद कहा कि पैसे बाद में ले जाना। अब तक लोगों ने पहले के पैसे तो नहीं ही दिए हैं और अब कपड़े भी प्रेस करने नहीं दे रहे हैं। मेरे मोहल्ले के परचून वाले ने तो अपनी दुकान ही बंद कर ली है क्योंकि ज्यादातर लोग उससे उधार मांग रहे थे और वह अब उधार देने की हालत में नहीं था।  पूरे हफ्ते करंसी की मार झेल रहे दिल्ली के थोक बाजारों को सोमवार को भी कम ही राहत मिलने की उम्मीद दिख रही है क्योंकि खुदरा विक्रेताओं के पास पैसे नहीं पहुंचे हैं। इसके साथ ही टाटा स्टील ने भी रविवार को कहा कि सरकार के बड़े नोटों को बाजार से एकदम हटा देने के कदम से छोटी मिलों व रोलिंग फैक्टरियों का कामकाज प्रभावित हो रहा है जहां ज्यादातर कारोबार नकदी में होता है। कंपनी ने कहा कि सरकार के विमुद्रीकरण के कदम से ग्रामीण भारत में इस्पात मांग पर अस्थाई असर होगा क्योंकि वहां ज्यादातर कारोबार नकदी में होता है।

“2000 रुपए के नोट सिर्फ बैंक से मिलेंगे, ATM से नहीं”: SBI चैयरमेन

 

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