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बजट 2016: बीमा, पेंशन, एआरसी, शेयर बाजारों में एफडीआइ नियमों को उदार बनाने का प्रस्ताव

बीमा और पेंशन क्षेत्रों में स्वयं मार्ग से 49 फीसद तक विदेशी निवेश की अनुमति होगी जो नियामकों द्वारा सत्यापित भारतीय प्रबंधन तथा नियंत्रण से जुड़े दिशानिर्देश के अनुरूप होगा।
Author नई दिल्ली | March 1, 2016 01:14 am
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार (29 फरवरी) को आम बजट पेश किया।

देश में अधिक से अधिक एफडीआइ आकर्षित करने के इरादे ने वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में बीमा, पेंशन, संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों और शेयर बाजारों समेत कई क्षेत्रों के लिए एफडीआइ नीति को उदार बनाने का सोमवार (29 फरवरी) को प्रस्ताव किया। बीमा और पेंशन क्षेत्रों में स्वयं मार्ग से 49 फीसद तक विदेशी निवेश की अनुमति होगी जो नियामकों द्वारा सत्यापित भारतीय प्रबंधन तथा नियंत्रण से जुड़े दिशानिर्देश के अनुरूप होगा।

इससे पहले, स्वयं मार्ग से 26 फीसद तक विदेशी निवेश की अनुमति थी। इसी प्रकार, संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) में एफडीआइ 100 फीसद होगा। इससे पहले, केवल 49 फीसद तक की ही अनुमति थी। जेटली ने यह भी कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) को एआरसी द्वारा जारी प्रतिभूति प्राप्तियों में 100 फीसद तक निवेश की अनुमति होगी बशर्ते यह क्षेत्रवार सीमा के अनुरूप हो। इसके अलावा, घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी इकाइयों के लिये निवेश सीमा घरेलू संस्थानाओं के समरूप 5.0 फीसद से बढ़ाकर 15 फीसद किया जाएगा।

उन्होंने कहा- इससे भारतीय शेयर बाजारों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और उम्दा प्रौद्योगिकी तथा वैश्विक बाजार गतिविधियों को अपनाने में तेजी आएगी। इसके अलावा बैंकों के अलावा शेयर बाजारों में सूचीबद्ध केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में एफपीआइ निवेश के लिए मौजूदा 24 फीसद की सीमा को बढ़ाकर 49 फीसद करने का प्रस्ताव किया गया है। जेटली ने कहा कि 18 विशेषीकृत एनबीएफसी गतिविधियों के अलावा उन अन्य गतिविधियों में स्वयं मार्ग से एफडीआइ की अनुमति दी जाएगी जिसका नियमन वित्तीय क्षेत्र नियामक करते हैं।

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के मद्देनजर और विकसित देशों में प्रचलित गतिविधियों को अनुकरण करते हुए विदेशी निवेशकों को निवासी का दर्जा दिया जाएगा जो कुछ शर्तों पर निर्भर है। फिलहाल इन निवेशकों को एक समय पर पांच साल तक के लिये ही व्यापार वीजा दिया जाता है। भारत और अन्य देशों के बीच हुए द्विपक्षीय निवेश संधियों के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये मंत्री ने ‘केंद्र राज्य निवेश समझौता’ पेश करने का प्रस्ताव किया।

उन्होंने कहा- इससे यह सुनिश्चित होगा कि इन संधियों के तहत राज्य अपनी बाध्यताओं को पूरा करेंगे। जो राज्य इन समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे, उसे विदेशी निवेशकों द्वारा आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देखा जाएगा। सरकार रक्षा, रेलवे, चिकित्सा उपकरण और नागर विमान पहले ही एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में एफडीआइ नीति को उदार बना चुकी है। देश में एफडीआइ चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-दिसंबर के दौरान 40 फीसद बढ़कर 29.44 अरब डालर रहा।

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