ताज़ा खबर
 

BRICS Summit: शी जिनपिंग बोले, नरमी के बावजूद ब्रिक्स की ताकत बरकरार

चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2008 के ऋण संकट से अभी पूरी तरह उबरना बाकी है।
Author बेनौलिम (गोवा) | October 16, 2016 21:38 pm
बेनौलिम (गोवा) में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (बाएं), भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (दाएं)। (AP Photo/Manish Swarup/16 Oct, 2016)

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार (16 अक्टूबर) को कहा कि 2008 में ऋण संकट तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था की हालत में ‘सुधार की राह में हचकोलों’ से ब्रिक्स देशों की आर्थिक वृद्धि पर असर जरूर पड़ा है लेकिन पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह की क्षमता तथा इनकी अंतर्निहित शक्ति बनी हुई है। चीनी राष्ट्रपति ने यहां ब्रिक्स व्यापार परिषद की शिखर बैठक को संबोधित करते हुए चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2008 के ऋण संकट से अभी पूरी तरह उबरना बाकी है और वह अभी ‘सुधार की राह के हचकोलों से संघर्ष कर रही है।’ उन्होंने स्वीकार किया कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं 2008 का संकट से न केवल धीमी हुई बल्कि 1930 के बाद की उस सबसे बड़ी नरमी के आठ साल बाद भी उससे उत्पन्न चुनौतियों को झेल रही हैं।

हालांकि जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि समूह के सदस्य देशों की संभावनाऔ और उनकी अंतर्निहित शक्ति कम नहीं हुई है और उनकी दीर्घकालिक संभावनाएं उत्साहजनक बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में विकास की गति बढ़ाने के लिहाज से नवप्रवर्तन महत्वपूर्ण है। शी ने कंपनियों से मजबूत और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए इस रास्ते का अनुकरण करने का अनुरोध किया। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि वैश्विक चुनौतियां बरकरार हैं लेकिन करीब दो दशक पुराने ब्रिक्स के विचारों के लिये नए दौर की भागीदारी में चुनौतियों के साथ अवसर दोनों हैं। उन्होंने कंपनियों से सभी उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और निवेश बढ़ाने एवं कदम उठाने को कहा जिससे बाजार, लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदरय का भरोसा मजबूत होगा।

उल्लेखनीय है कि यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब चीनी अर्थव्यवस्था का वृद्धि आधारित मॉडल वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकट के कारण प्रभावित हुआ है। चीन का दशकों से चला आ रहा उच्च बचत और कर्ज के इस्तेमाल से निवेश का मॉडल कोई बड़ा घरेलू बाजार सृजित करने में विफल रहा। इसके साथ ही 2008 के रिण संकट से उत्पन्न वैश्विक नरमी से साम्यवादी चीन के नेताओं की योजनाओं को असफल कर दिया। दशकों तक दहाई अंक में वृद्धि के लिये चर्चित दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अरबों डॉलर के फंसे कर्ज एवं भ्रष्टाचार का सामाना कर रही है। लंबे समय से नरमी को देखते हुए कई विश्लेषण आगाह करने लगे हैं कि चीन की कठिनाइयां किसी भी समय बढ़ सकती है।

समूह में शामिल ब्राजील भी उच्च मुद्रास्फीति और राजनीतिक समस्याओं के साथ वृद्धि में गिरावट से जूझ रहा है। वहीं संसाधनों से मालामाल रूस के समक्ष भू-राजनीतिक जोखिम से जोखिम है। वह यूक्रेन में क्रीमिया क्षेत्र पर अधिकार करने को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से आर्थिक पाबंदी का सामना कर रहा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में नरमी से भी उसकी समस्या बढ़ी है। शी चिनफिंग ने ब्रिक्स के बीच ‘परिणाम उन्मुख’ सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया और ब्रिक्स व्यापार परिषद से बड़ी परियोजनाओं के संयुक्त क्रियान्वयन के विचार की संभावना तलाशने को कहा।

चीनी नेता ने कहा कि नव विकास बैंक परिणम उन्मुख रुख का नतीजा है और उसके कामकाज को पूरी तरह से समर्थन देने की चीन की प्रतिबद्धता दोहरायी। बैंक ने पिछले साल शंघाई में अपना कामकाज शुरू किया। ब्राजील के नव-नियुक्त राष्ट्रपति माइकल तेमार ने व्यापार परिषद की बैठक में कहा कि उनकी सरकार अधिक संख्या में रोजगार सृजन के साथ आर्थिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। साथ ही उन्होंने पारिस्थितिकी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जतायी। वह अपने पूर्ववर्ती डिलमा रोसेफ पर महाभियोग के बाद सत्ता में आए। तेमार ने कहा कि दक्षिण अमेरिकी देश अपने नौकरशाही को दुरुस्त करेगी ताकि कामकाज तेजी से हो सके। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सड़क, राजमार्ग, बंदरगाह और तेल क्षेत्रों में 34 परियोजनाओं की पहचान की है जो सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वृद्धि को गति देने और उसे टिकाऊ बनाने में व्यापार की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया के कुछ प्रमुख उपभोक्ताओं बाजारों का स्थान है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने कहा कि पिछले तीन साल में ब्रिक्स व्यापार परिषद की गतिविधियां ऐसी अवस्था में पहुंच गयी है जहां यह वृद्धि के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है। अपने देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगगारी और पूरे देश में छात्रों का विरोध प्रदर्शन का सामना कर रहे जुमा ने उन क्षेत्रों को रेखांकित किया जहां भागीदारी की जरूरत है। इसमें बीमा और पुनर्बीमा, ब्रिक्स बीज बैंक समेत बिजली और पोरषण समेत बुनियादी ढांचा, विमानन तथा बड़े पैमाने पर विनिर्माण शामिल है ताकि बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हो सके। अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी का स्तर 25 प्रतिशत है जबकि ऐसे लोगों की संख्या कहीं अधिक है जिनके पास कोई रोजगार नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग