December 07, 2016

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कालेधन से लड़ाई के लिए कलम तक नहीं दी

कालेधन के खिलाफ बड़े नोटों की बंदी के दूसरे दिन सुबह की किरण फूटते ही लोगों की मंजिल बच्चों के स्कूल, मंदिर, दफ्तर नहीं अपने इलाके के बैंक थे।

कालेधन के खिलाफ बड़े नोटों की बंदी के दूसरे दिन सुबह की किरण फूटते ही लोगों की मंजिल बच्चों के स्कूल, मंदिर, दफ्तर नहीं अपने इलाके के बैंक थे। लेकिन गुरुवार को लोगों का आरोप था कि सरकार के नुमाइंदे मंगलवार रात से अपनी पीठ ठोकने के बजाए जनता और बैंक के बीच समन्वय बनाने की कोशिश करते तो अच्छा रहता।  लोगों को इतना पता था कि आपको अपना परिचयपत्र लाना है, लेकिन उसकी फोटो कॉपी लानी है और पैसे बदलने के बदले एक फॉर्म भी भरना है इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। इसके साथ ही बैंकों में लंबी कतार ने लोगों के होश उड़ा दिए। जो लोग सुबह सात बजे जाकर लाइन में खड़े हो गए थे उन्हें दोपहर 12 बजे गुलाबी दो हजारी नोटों के दर्शन हुए। कई जगहों पर खड़ी महिलाओं ने कहा कि पति को दफ्तर जाना था इसलिए हमें ही लाइन में लगना पड़ा है। कुछ महिलाएं तो बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद बैंक की कतार में लगी थीं और उन्हें बिना पैसे वापस लिए इसलिए लौटना पड़ा कि बच्चे को स्कूल से लेकर आने का वक्त हो गया था।

 


मयूर विहार इलाके में एक बच्ची ने स्कूल से लौटते वक्त बैंक के बाहर लंबी कतार देख कर पूछा, ‘मम्मी आज इलेक्शन है क्या, आपने वोट दे दिया’। हालांकि कुछ लोग लंबी कतार के बाद भी परेशान नहीं दिखे और एक व्यक्ति ने लोगों की परेशानी सुन रहे पत्रकार को अपनी बात जोर से सुनाते हुए कहा कि मोदी जी ने एक बार वोट के लिए लाइन में लगवाया तो दूसरी बार नोट के लिए, और दोनों बार लाइन लगने से देश का भला ही हुआ। इसके साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइटों पर नए नोटों के साथ सेल्फी डालने की कवायद भी पूरे दिन चलती रही।

नोएडा के एसबीआइ की एक शाखा में दो घंटे से कतार में खड़े राजेश जब अंतत: अपने पैसों को नए नोटों से बदलवाने के लिए खिड़की पर पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि अपने परिचयपत्र की फोटोकॉपी करवा के आएं। दो घंटे से कतार में खड़े राजेश ने कहा कि मुझे तो लगा कि अब चक्कर आ जाएगा। और यह नजारा दिल्ली-एनसीआर के हजारों बैंकों का था। विवेक विहार के पास रहने वाली रेवती को बैंक जाने के बाद पता चला कि उन्हें एक फॉर्म भी भरना है। रेवती के पास कलम नहीं थी। उसने बैंक के कर्मचारी से कलम मांगी तो उसने रेवती को बुरी तरह झिड़क दिया। आखिरकार लाइन में खड़े एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति की पीठ के सहारे रेवती का फॉर्म भरा।

क्षुब्ध रेवती ने कहा कि कालेधन की लड़ाई के नाम पर हमारी मेहनत के पैसों को कागज बना दिया और अब कलम मांगा तो मेरा अपमान कर दिया। हम आम जनता कीड़े-मकोड़े हैं क्या? हम तो टीवी से ही चिपके रहे। जीपीएस चिप वाले नोट की अफवाह तो उड़वा दी लेकिन यह सही जानकारी जनता तक नहीं पहुंचाई कि बैंक में किस तैयारी से आना है। एक कॉलेज छात्रा ने चिढ़कर कहा कि प्रधानमंत्री जी जरा लोगों को कतार में खड़े रहने की तमीज भी सिखा देते, बिना सूखा-अकाल आए, आपातकाल की स्थिति आए एक नागरिक के तौर पर पहली बार इस तरह की दिक्कत झेलने के लिए मजबूर हूं। वहीं कालेधन के खिलाफ इस बड़ी कवायद के तहत ही नोटों की कालाबाजारी का भी मामला सामने आया। दिपाली भोपाल से दिल्ली पहुंचने के लिए बुधवार को ट्रेन पर बैठी। उसके पास तीन हजार के 500 के नोटों के अलावा पचास रुपए का एक नोट था। एक बोतल पानी खरीदने के बाद उसके पास महज तीस रुपए ‘जिंदा रकम’ बची थी। उसने दिल्ली के अशोक विहार स्थित अपनी चाची को फोन किया। चाची ने कहा कि वह स्टेशन से आॅटो लेकर घर आए, हम पैसे देने का इंतजाम करेंगे। इसके बाद दिपाली ने चाची को फोन कर बताया कि ट्रेन में टीटीई अंकल ने उसकी मदद कर दी है। टीटीई ने दिपाली को ऐसे ‘वेंडर’ से मिलाया जिसने उसे 500 के दो नोटों (एक हजार) के बदले 800 रुपए दिए। दिल्ली से लेकर पटना, वाराणसी, लखनऊ तक से कई लोगों ने बताया कि उन्होंने कमीशन देकर अपने बड़े नोट तुड़वाए।
वहीं दिल्ली की खाड़ी बावली से लेकर सरिता विहार लेबर चौक और नोएडा के लेबर चौक पर दिहाड़ी मजदूरों के लिए दूसरा दिन भी मुसीबत भरा रहा। नोएडा के लेबर चौक पर बेलदार के रूप में काम करने वाले श्रमिक रामकुमार ने कहा कि मालिक ने कहा है कि हमें मजदूरी के लिए एक से दो दिन और का इंतजार करना होगा। रामकुमार ने कहा कि कल से पास के सारे पैसे खर्च हो गए। आज तो दोस्त ने खाना खिला दिया है। रामकुमार ने कहा कि मेरा और यहां काम कर रहे मेरे गांव के बहुत से लोगों का यहां बैंक खाता भी नहीं है। यहां मजदूरी कर अपना पेट पालने वाले पूर्वांचल के बहुत से श्रमिक छठ पूजा संपन्न होने के बाद मंगलवार और बुधवार को ही लौटे हैं और उनके हाथ खाली हैं। और अब यहां दिहाड़ी भी हाथ में नहीं आ रही है।

वहीं गुरुवार को खुल्ले के चक्कर में सड़कें भी सूनी रहीं। आनंद विहार मेट्रो स्टेशन के सामने गाजियाबाद में प्रवेश करने वाली जगह पर आम दिनों में इतना जाम लगा रहता था कि लोग इस रास्ते जाने से बचते थे। लेकिन गुरुवार को यहां सड़क खाली थी और जो गाड़ियां गुजर रही थीं, इसके पहले कभी-कभी ही यहां से इतने फर्राटे से निकलती थी। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से आनंद विहार स्थित विवेकानंद अंतरराज्यीय बस अड्डे से प्रवेश करने वालीं ज्यादातर बसें खाली थीं। आम दिनों में व्यस्त समय में इन बसों में तिल रखने की भी जगह नहीं होती थी।

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First Published on November 11, 2016 12:39 am

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