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बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते पर आम सहमति बनायी जाए: भारत

बिम्सटेक सात देशों का एक समूह है जिसमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं।
Author नई दिल्ली | October 14, 2016 18:51 pm
नई दिल्ली में सीआईआई और विश्व आर्थिक मंच द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित भारत आर्थिक शिखर सम्मेलन को पहले दिन संबोधित करतीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन। (PTI Photo by Shahbaz Khan/6 Oct, 2016/File)

भारत ने बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों के मंच बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में देरी पर चिंता जताते हुए सदस्यों से इस पर आम सहमति कायम करने के लिए सक्रियता से प्रयास करने की अपील की है। बिम्सटेक सात देशों का एक समूह है जिसमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं। बिम्सटेक ने फरवरी 2004 में इस क्षेत्र में वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए करार की रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए हैं। वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘इस बारे में बहुत बातें हो चुकी हैं लेकिन हम अब तक एफटीए पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं। हां यह चिंता की बात है और बिम्सटेक के सदस्यों को इस पर आम सहमति बनाने के लिए सक्रिय तौर पर कार्य करना चाहिए।’

निर्मला ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच परस्पर सहयोग की संभावनाओं को समझने और क्षेत्रीय मूल्यवर्धन (विनिर्माण) श्रृखलाओं को मजबूत करने से इनकी अर्थव्यवस्थाओं को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह, ‘शर्म की बात है कि बिम्सटेक क्षेत्र में अब भी एक देश से दूसरे देश में जाना कष्टसाध्य है जबकि यह इलाका अच्छी तरह संपर्क सुवधाओं से जुड़ा है, बंगाल की खाड़ी हमें जोड़ती है, स्थलीय मार्ग भी हमें जोड़ते है।’ उन्होंने क्षेत्र में समुद्रीय और बंदरगाह सुविधाओं को मजबूत करने पर भी बल दिया तकि सामान की आवाजाही तेज और कम खर्चीली हो सके।

सीतारमण ने बिम्सटेक के बीच बांग्लादेश के रास्ते डिजिटल सम्पर्क बढाने तथा समुद्रीय ऑप्टिकल फाइबर संपर्क मजबूत किए जाने पर जोर दिया। बिम्सटेक देशों की कुल आबादी 1.5 अरब है जो दुनिया की आबादी का 22 प्रतिशत है। इन देशों का सकल घरेलू उत्पाद सालाना 2,700 अरब डॉलर के बराबर है। बैठक में नेपाल के वाणिज्य मंत्री रोमी गउंद थकाली ने कहा कि उनका देश बिम्सटेक को काफी महत्व देता है और पारंभिक सहमति को जल्द से जल्द एक ठोस व्यवस्था का रूप देने को प्रतिबद्ध है।

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