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पहली बार एक साथ 10 न्यूक्लियर रिएक्टर्स के निर्माण को सरकार ने दी मंजूरी

वर्तमान में कुल 22 रिएक्टर चलाए जा रहे हैं। नए रिएक्टर्स पुरानों की तुलना में ज्यादा क्षमता वाले हैं।
न्यूक्लियर रिएक्टर (सांकेतिक तस्वीर)

देश की न्यूक्लियर पावर इंडस्ट्री में अभी तक का सबसे बड़ा विस्तार करते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 10 नए न्यूक्लियर रिएक्टर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह पहली बार है जब इतनी संख्या में न्यूक्लियर रिएक्टर्स को एक साथ मंजूरी मिली हो। वर्तमान में कुल 22 रिएक्टर चलाए जा रहे हैं। नए रिएक्टर्स पुरानों की तुलना में ज्यादा क्षमता वाले हैं। पुराने 20 रिएक्टर्स 220 MWe (मेगा वॉट इलेक्ट्रिक) वाले और 2005 व 2006 में तारापुर में लगाए गए दो रिएक्टर 540 MWe क्षमता वाले हैं। वहीं, नए रिएक्टर्स की क्षमता 700 MWe होगी। यह दस रिएक्टर्स राजस्थान के माही बंसवाड़ा (यूनिट 1, 2, 3, 4), हरियाणा के गोरखपुर (यूनिट 3 और 4), कर्नाटक के कैगा (यूनिट 5 और 6) और मध्य प्रदेश के चुटका (यूनिट 1 और 2) में लगाए जाएंगे।

इसके अलावा बिजली घरों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये बुधवार को सरकार ने एक नई कोयला आपूर्ति व्यवस्था संबंधी नीति को मंजूरी दे दी। इसके तहत बिजली क्षेत्र को ईंधन की आपूर्ति नीलामी मार्ग या प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया पर आधारित बिजली खरीद करार (पीपीए) के तहत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह फैसला किया गया। इस कदम से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को कोयले आपूर्ति उपलब्ध न होने की समस्या को दूर किया जा सकेगा।

बिजली घरों के लिये इस नई कोयला आपूर्ति व्यवस्था से उत्पादकों को व्यवस्थित तरीके से ईंधन की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के अनुसार सरकार के प्रयास और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों से इस शुष्क ईंधन के दाम नीचे लाने में मदद मिली है और घरेलू उत्पादन बढ़ा है। लेकिन बिजली संयंत्रों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कोयला संपर्क उपलब्ध कराने के लिये एक प्रणाली की जरूरत है। सूत्रों का कहना है कि नई नीति से यह चिंता दूर होगी और बिजली घरों के लिये उनकी जरूरत के मुताबिक कोयले की आपूर्ति के वास्ते उचित प्रणाली तैयार होगी।

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