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ATM सेवाएं सामान्य होने में लगेंगे अभी कम से कम 21 दिन

वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
Author नई दिल्ली | November 13, 2016 04:14 am
एटीएम से पैसा निकालने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते लोग। (Source: Reuters)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि बड़े नोटों को प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया में आम आदमी की दिक्कतों में अभी और इजाफा हो सकता है। उनके अनुसार, पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोटों को प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया काफी बड़ी है और आने बाकी वाले कुछ और दिनों तक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने लोगों से कहा कि नकद के बजाए लोगों को लेन-देन के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के इस्तेमाल की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एटीएम सेवाएं सामान्य होने में दो से तीन हफ्ते का समय लग सकता है। तकनीक के हिसाब से कुछ समस्याएं हैं। जारी हो रहे नए नोटों के लिए नए सॉफ्टवेयर एटीएम मशीनों में लगाए जाने हैं।

हड़बड़ी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में जेटली के साथ आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य भी मौजूद थे। अरुण जेटली ने एटीएम मशीनों से लेन-देन में तकनीकी दिक्कतों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एटीएम मशीनों के सॉफ्टवेयर नए नोटों के स्वरूप के हिसाब से तैयार नहीं हैं। पुराने सॉफ्टवेयर में 100, 500 और एक हजार के नोटों के लिए व्यवस्था थी। अब नए नोटों के लिहाज से नई व्यवस्था करनी पड़ रही है। नए नोटों की साइज भी अलग है। इसलिए एटीएमसे सिर्फ एक सौ रुपए के नोट मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए बदलाव को गोपनीय रखने के लिए एटीएम मशीनों में पहले से कोई बदलाव नहीं किया गया था।

वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के बयान बेहद गैरजिम्मेदाराना हैं। सुझाव दे रहे हैं कि एक सप्ताह की छूट दो, फिर नई व्यवस्था लागू करो। हम ऐसा कर देते तो काले धन को हवाला के जरिए विदेश भेज दिया गया रहता।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि कैश की कोई कमी नहीं है। बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं। सामान्य गतिविधियों से इतर बैंकों के सामने बड़े आॅपरेशन को अंजाम देने की चुनौती है। उन्होंने कहा, ‘यह आॅपरेशन कितना बड़ा है, उसे एसबीआइ के आंकड़ों के संदर्भ में समझना चाहिए। शनिवार की दोपहर 12.15 बजे तक एसबीआई ने अकेले करंसी बदलने के लिए दो करोड़ 28 लाख के लेन-देन किए हैं। इस दौरान स्टेट बैंक का मौद्रिक लेन-देन 54,370 करोड़ रुपए का रहा है। इसमें नकदी जमा 47868 करोड़ रुपए है।’ वित्त मंत्री के अनुसार, समूची कवायद का उद्देश्य यही था कि अधिक से अधिक नकदी बैंकिंग की प्रक्रिया में आ जाएं। एसबीआइ के साथ दूसरे बैंकों को मिला लें तो नकदी जमा का आंकड़ा एक लाख करोड़ से कहीं ज्यादा का होगा।

जेटली के अनुसार, अकेले एसबीआइ में नकदी बदलने के 58 लाख लेन-देन और एटीएम से 22 लाख लेन-देन हुए हैं। 33 लाख लोगों ने रकम निकाली है। करोड़ों की संख्या में लोगों ने रकम जमा कराई है। उन्होंने इस बात का भरोसा दिलाया कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त मात्रा में करंसी है। उन्होंने कहा कि यह आशंका पहले से थी कि इस बड़े आॅपरेशन में समय लगेगा। 30 दिसंबर तक लोगों के पास समय है। हड़बड़ी करने की कोई जरूरत नहीं।’

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