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व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद के सुर पर अरुण जेटली ने जताई चिंता

जेटली ने कहा कि हालांकि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन साबित करता है कि वैश्वीकरण वास्तविकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Author मुंबई | October 13, 2016 17:15 pm
मुंबई में निवेश प्रवाह पर ब्रिक्स संगोष्ठी को संबोधित करते केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI Photo by Mitesh Bhuvad/13 Oct, 2016)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (13 अक्टूबर) पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं, विशेषरूप से अमेरिका में बढ़ती संरक्षणवाद की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद कारोबारी कामकाज सामान्य हो जाएगा। जेटली ने गुरुवार को निवेश प्रवाह पर ब्रिक्स संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरा मानना है कि आज धरातल पर जो संकेतक दिखाई दे रहे हैं, उसके अनुसार विकसित दुनिया का एक हिस्सा संरक्षणवाद की ओर बढ़ रहा है। ये चिंताएं वास्तविक हैं क्योंकि इस तरह की नीतियों के फैलने का दुनिया के अन्य हिस्सा पर काफी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।’

हालांकि वित्त मंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद के रिपब्लिक उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि ये भय वास्तविक है, क्योंकि अधिक से अधिक संरक्षणवादी होता जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि जिस तरह से ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन खुली अर्थव्यवस्था बना रहना चाहता है, अमेरिका में भी राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होने के बाद इस तरह के खतरे समाप्त हो जाएंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 8 नवंबर को है।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘मेरा खुद का अनुभव है कि चुनाव के दौरान कुछ बयान राजकाज के संचालन के बोझ की वजह से दिए जाते हैं। चुनाव के दौरान बहस का रुख संरक्षणवाद का होता है और बाद में सब कुछ सामान्य हो जाता है। ऐसे में हमें इंतजार करना होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि चुनाव की गर्मी निकल जाने के बाद मुक्त व्यापार वापस लौटेगा।’

ट्रंप व्यापार में संरक्षणवाद की बात कर रहे हैं और उन्होंने अन्य देशों के साथ अमेरिका के मुक्त व्यापार समझौतों को समाप्त करने की चेतावनी दी है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीन को स्थानांतरित किए गए विनिर्माण को वापस लाने की भी बात कही है। इसी तरह ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में मतदान करने की प्रमुख वजह बेहतर शिक्षित आव्रजकों की तुलना में कम शिक्षित स्थानीय को हो रहा नौकरियां का नुकसान है।

जेटली ने कहा कि हालांकि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन साबित करता है कि वैश्वीकरण वास्तविकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वित्त मंत्री ने कहा, ‘मुझे यह देखकर हैरानी हुई जब ब्रिटेन के अधिकारियों ने मुझसे कहा कि इसे संरक्षणवाद के संकेत के रूप में न देखा जाए और मुक्त व्यापार को लेकर हमारी नीति जारी रहेगी।’

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